प्रदीप पूर्णेकर हत्याकांड के बीच मीनाक्षी शिंदे का इस्तीफा, छोड़ा महिला आघाड़ी प्रमुख का पद

HIGHLIGHTS
- मीनाक्षी शिंदे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर इस्तीफे की जानकारी दी।
- उन्होंने कहा कि यह फैसला पार्टी की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए लिया है।
- प्रदीप पूर्णेकर की 29 सितंबर को हत्या हुई थी।
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के पदाधिकारी प्रदीप पूर्णेकर की हत्या के मामले में पुलिस पूछताछ के दो दिन बाद ठाणे की पूर्व महापौर और शिवसेना नेता मीनाक्षी शिंदे ने गुरुवार को पार्टी के ठाणे जिला महिला आघाड़ी प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया।
मीनाक्षी शिंदे ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस्तीफा नाराजगी के कारण नहीं, बल्कि पार्टी की प्रतिष्ठा बनाए रखने और नेतृत्व को विपक्ष के निशाने पर आने से बचाने के लिए दिया है।
प्रदीप पूर्णेकर की 29 सितंबर को हत्या के बाद से ही मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे विपक्षी महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के निशाने पर हैं। विपक्षी दलों और मृतक के परिजनों ने हत्या की साजिश में शिंदे दंपती की कथित भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं। हालांकि, मीनाक्षी शिंदे और उनके पति इन आरोपों को नकारते रहे हैं।
मीनाक्षी शिंदे का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब इस हत्याकांड को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है। विपक्ष मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। वहीं, मृतक के परिजन भी लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।
पांच संदिग्ध गिरफ्तार, हत्या का मकसद अब तक स्पष्ट नहीं
ठाणे पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) इस हत्याकांड की जांच कर रही है। पुलिस अब तक पांच संदिग्धों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन हत्या के पीछे की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। पूर्णेकर शहर में शिवसेना (यूबीटी) के मानपाड़ा विभाग प्रमुख थे।
मंगलवार को एसआईटी ने मीनाक्षी शिंदे से भी पूछताछ की थी। इसके बाद बुधवार को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने प्रेसवार्ता में बताया कि जांच के दौरान जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन सभी की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, मामले से जुड़े हर पहलू की पड़ताल की जा रही है। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना और विपक्षी शिवसेना (यूबीटी) के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चली आ रही है। प्रदीप पूर्णेकर हत्याकांड के बाद दोनों पक्षों के बीच यह टकराव और तेज हो गया है।
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