कोविड वैक्सीन से हुई मौत पर मुआवजे के लिए नीति बनाएँ केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि कोविड-19 टीकाकरण के बाद किसी की मौत होने पर मुआवजे के लिए संपूर्ण नीति बनाई जाए। शीर्ष अदालत ने केंद्र को निर्देश दिए हैं कि वह इस संबंध में जवाब दाखिल करे।
मामला 2023 का है, जब केरल की महिला सईदा केए ने अपने पति की कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभाव से हुई मौत का दावा करते हुए मुआवजे की मांग की थी। उन्होंने केरल उच्च न्यायालय का रुख किया था और आरोप लगाया था कि टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए कोई नीति मौजूद नहीं है।
केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को आदेश दिया था कि वह ऐसे मामलों में मुआवजे के लिए नीति बनाए और कोविड टीकाकरण के बाद हुई मौतों की पहचान करे। इस फैसले के खिलाफ केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसके चलते 2023 में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई गई थी।
केंद्र की दलील
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कोविड महामारी को आपदा घोषित किया गया था, लेकिन टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभाव (AEFI) इसमें शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में मुआवजे की कोई नीति नहीं है और टीकाकरण अभियान चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत ही चलाया गया।
हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि कोविड-19 मौतों और टीका से हुई मौतों को अलग नहीं माना जा सकता, क्योंकि पूरा टीकाकरण अभियान महामारी का हिस्सा था। पीठ ने कहा कि ये दोनों आपस में जुड़े हुए हैं और केंद्र को इसके लिए नीति बनाने की आवश्यकता है।
अगली सुनवाई और प्रक्रिया
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से तीन सप्ताह का समय मांगा ताकि केंद्र इस पर लिखित जवाब पेश कर सके। सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। अगले सुनवाई की तारीख 18 मार्च तय की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई टीकाकरण अभियान में हुई मौतों और दुष्प्रभावों को लेकर स्पष्ट दिशा देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
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