2,000 रुपये से कम के गुमनाम नकद चंदे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, आयकर कानून को चुनौती

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट में गुमनाम नकद चंदे के प्रावधान पर सुनवाई।
- याचिका में आयकर अधिनियम की धारा 13ए के खंड (डी) को चुनौती।
- राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता की मांग की गई।
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को आयकर अधिनियम के उस प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसके तहत राजनीतिक दल 2,000 रुपये से कम का गुमनाम नकद चंदा ले सकते हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ कर सकती है।
याचिकाकर्ता खेम सिंह भाटी का कहना है कि गुमनाम नकद चंदे से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता प्रभावित होती है। उनका तर्क है कि इसके कारण मतदाताओं को राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के स्रोत और दानदाताओं के उद्देश्यों की जानकारी नहीं मिल पाती।
आयकर अधिनियम की किस धारा को चुनौती दी गई?
याचिका में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए के खंड (डी) को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है, "याचिकाकर्ता यह निर्देश देने की मांग कर रहा है कि राजनीतिक दलों को किसी भी राशि का भुगतान करने वाले व्यक्ति का नाम और अन्य सभी विवरण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कोई भी राशि नकद में स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।"
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के उस फैसले का भी उल्लेख किया है, जिसमें चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द किया गया था। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया में पारदर्शिता होना जरूरी है।
राजनीतिक दलों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की मांग
याचिका में निर्वाचन आयोग को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा दाखिल किए जाने वाले फॉर्म 24ए में चंदे से जुड़े विवरणों की जांच करने का निर्देश देने की मांग भी की गई है।
याचिकाकर्ता ने उन राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जो दानदाताओं के पते और स्थायी खाता संख्या समेत पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराते हैं।
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