गणेश उत्सव से पहले महाराष्ट्र में डीजे को लेकर बढ़ी बहस, नेताओं ने जताया विरोध

HIGHLIGHTS
- स्वास्थ्य राज्यमंत्री मेघना बोर्डिकर ने डीजे से जुड़ी एक निजी त्रासदी का जिक्र किया।
- बोर्डिकर के अनुसार, तेज आवाज वाले डीजे के खिलाफ पहले भी लगातार अपील की जाती रही है।
- संजय शिरसाट ने नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने और वाहनों की जब्ती की चेतावनी दी।
गणेश उत्सव से पहले महाराष्ट्र में डीजे और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हो गई है। छत्रपति संभाजीनगर में स्वास्थ्य राज्यमंत्री मेघना बोर्डिकर और जिला पालकमंत्री संजय शिरसाट ने डीजे के इस्तेमाल का विरोध किया है। दोनों नेताओं ने लोगों से पारंपरिक तरीके से उत्सव मनाने की अपील की। उनका कहना है कि त्योहार खुशी के साथ मनाया जाना चाहिए, लेकिन इसकी वजह से दूसरों को परेशानी या स्वास्थ्य संबंधी खतरा नहीं होना चाहिए।
मेघना बोर्डिकर ने क्या कहा?
मेघना बोर्डिकर ने बताया कि पिछले साल उनके एक कजिन की डीजे सिस्टम की वजह से मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि लोगों से लगातार डीजे को लेकर अपील की जाती है और सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी इससे जुड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कई लोग उनका पालन नहीं करते।
बोर्डिकर ने कहा कि डीजे का इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है और वह खुद इस तरह की त्रासदी झेल चुकी हैं।
छत्रपति संभाजीनगर प्रशासन की चेतावनी
गणेश उत्सव की तैयारियों को लेकर हुई बैठक के बाद संजय शिरसाट ने स्पष्ट किया कि शहर में डीजे सिस्टम नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा और डीजे उपकरण ले जाने वाले वाहनों को जब्त किया जाएगा।
शिरसाट ने गणेश मंडलों से अपील की कि कार्रवाई से बचने के लिए वे खुद ही तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों को भी आराम से उत्सव में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए।
पुणे में भी डीजे के खिलाफ विरोध
रविवार को पुणे में तेज आवाज वाले डीजे सिस्टम के विरोध में मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने ऐसे साउंड सिस्टम पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की। उनका कहना था कि शोर प्रदूषण से सुरक्षा और शांतिपूर्ण वातावरण हर नागरिक का अधिकार है।
यह मार्च बालगंधर्व रंग मंदिर से शुरू होकर पुणे नगर निगम मुख्यालय तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब सोलापुर और नागपुर जैसे शहरों में डीजे पर रोक लगाने की घोषणाएं की गई हैं, तो पुणे में ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता।
प्रदर्शन के बाद हुई सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि शनिवार को हुए दही हांडी कार्यक्रम के दौरान पुणे पुलिस तेज आवाज पर नियंत्रण करने में नाकाम रही।
बापट पर हमले के विरोध में निकला मार्च
इस मार्च का आयोजन लाउडस्पीकर ऑपोजिशन पुणे सिटीजन्स फोरम की ओर से किया गया था। यह आयोजन उस घटना के बाद हुआ, जिसमें डीजे पर रोक लगाने की मांग कर रहे कार्यकर्ता विद्यानंद बापट पर हमला हुआ था।
बापट लंबे समय से त्योहारों में तेज आवाज वाले डीजे के इस्तेमाल के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। महाराष्ट्र में गणेश उत्सव से पहले डीजे और हाई-डेसीबल साउंड सिस्टम के विरोध की मांग अब और मुखर होती दिखाई दे रही है।
एक ओर प्रशासन नियमों के पालन की बात कर रहा है, वहीं नागरिक संगठन डीजे पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.

Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.