धर्मेंद्र प्रधान को पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था: मौलाना कल्बे जव्वाद

HIGHLIGHTS
- मौलाना कल्बे जव्वाद ने छात्र आंदोलन, पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
- उन्होंने छात्रों पर कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
- देश में भाईचारा बनाए रखने और राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश नीति तय करने की बात कही।
मुजफ्फरनगर। सर्राफा बाजार स्थित शिया मोहल्ले में मोहर्रम के मौके पर आयोजित मजलिस में शामिल होने पहुंचे प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने छात्र आंदोलन, पेपर लीक मामले, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, देश के सामाजिक माहौल और भारत की विदेश नीति समेत कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज को सुना जाना चाहिए और देश में आपसी भाईचारा बना रहना जरूरी है।
उन्होंने मोहर्रम का जिक्र करते हुए कहा कि यह समय शहादत, त्याग और इंसाफ की सीख देता है। छात्र आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि लंबे समय तक संघर्ष करने वाले और अपनी बात मजबूती से रखने वाले छात्र बधाई के पात्र हैं।
पेपर लीक मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को काफी पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस मामले में गंभीर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे और ऐसे में इस्तीफा देना उचित कदम है।
छात्रों पर कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग
आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी मौलाना कल्बे जव्वाद ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्होंने आंदोलन से जुड़े कई वीडियो देखे हैं, जिनमें छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि अगर प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की ज्यादती हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। जांच में यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
'भारत की ताकत विविधता और भाईचारे में है'
देश के सामाजिक माहौल पर बोलते हुए मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि भारत की पहचान हमेशा प्रेम, भाईचारे और विविधता में एकता की रही है। उन्होंने कहा कि नफरत की राजनीति से बचने की जरूरत है और सभी धर्मों व समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने भारत को विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का "गुलदस्ता" बताते हुए कहा कि यही विविधता देश की सबसे बड़ी ताकत है।
सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर जोर
मौलाना ने कहा कि सरकार की कई योजनाएं अच्छी होती हैं, लेकिन उनका लाभ पूरी तरह अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर सुधार की जरूरत बताते हुए कहा कि योजनाओं का असर तभी दिखाई देगा, जब उनका लाभ जरूरतमंद लोगों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे।
विदेश नीति पर भी रखी बात
भारत-इजरायल संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर मौलाना कल्बे जव्वाद ने अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर तय करनी चाहिए।
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