गांवों में डायबिटीज की जांच होगी आसान, जितेंद्र सिंह ने IIT मुंबई के सहयोग से बना डिजिटल पोर्टल किया लॉन्च

HIGHLIGHTS
- ग्रामीण भारत में बढ़ती मधुमेह की चुनौती से निपटने के लिए RSSDI ने RROP डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया।
- केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वतंत्रता दिवस पर RROP डेटा एंट्री पोर्टल का शुभारंभ किया।
- यह कार्यक्रम RSSDI ने IIT मुंबई के सहयोग से तैयार किया है।
मुंबई। ग्रामीण इलाकों में मधुमेह की बढ़ती समस्या से निपटने और गांवों तक जांच एवं उपचार की सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (RSSDI) और IIT मुंबई की साझेदारी में तैयार किए गए रूरल आउटरीच प्रोग्राम (RROP) के डेटा एंट्री पोर्टल को लॉन्च किया गया। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसका शुभारंभ किया।
जितेंद्र सिंह ने RSSDI रूरल आउटरीच प्रोग्राम (RROP) के डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ मरीजों के लिए तैयार की गई ‘RSSDI विश्वास’ वीडियो श्रृंखला भी लॉन्च की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश के अंतिम गांव तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना समावेशी और तकनीक आधारित विकास का हिस्सा है, जिसके लिए विकसित भारत प्रतिबद्ध है।
स्वतंत्रता दिवस पर हुआ पहल का शुभारंभ
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इन दोनों पहलों का शुरू होना खास महत्व रखता है। उनके मुताबिक, ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, डॉक्टरों और डिजिटल तकनीक के समन्वय से मधुमेह की समय पर पहचान और उसके प्रभावी प्रबंधन में मदद मिलेगी। वहीं, ‘विश्वास’ वीडियो मरीजों को उनकी अपनी भाषा में बीमारी को समझने और आत्मविश्वास के साथ इसे नियंत्रित करने में उपयोगी होंगे।
उन्होंने इस पहल के लिए RSSDI और उसके सहयोगियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने वाली ऐसी योजनाएं आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
RROP तीन साल का समुदाय आधारित कार्यक्रम है। इसके तहत वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमेह की स्क्रीनिंग, मरीजों को बीमारी के बारे में जानकारी देना, स्वयं देखभाल और बीमारी से जुड़ी जटिलताओं की निगरानी पर ध्यान दिया जाएगा।
कार्यक्रम के पहले चरण में 100 गांवों के ग्रामीणों की जांच की जाएगी। इनमें मधुमेह से पीड़ित पाए जाने वाले लोगों को तीन साल तक निगरानी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
इस अवसर पर RSSDI के अध्यक्ष डॉ. अनुज माहेश्वरी ने कहा कि मधुमेह अब सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित बीमारी नहीं है और ग्रामीण भारत में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में जांच और विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल की पहुंच अभी भी सीमित है।
उन्होंने कहा कि RROP के जरिए संस्था उन समुदायों तक व्यवस्थित जांच, रोगी शिक्षा और जटिलताओं की निगरानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता मोबाइल फोन या टैबलेट के जरिए मरीजों की जांच से जुड़ी जानकारी और चिकित्सकीय आंकड़े दर्ज कर सकेंगे। कम इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले इलाकों को ध्यान में रखते हुए इसमें ऑफलाइन सुविधा भी दी गई है।
RSSDI के चिकित्सक सुरक्षित वेब पोर्टल पर मरीजों के मामलों की समीक्षा करेंगे। वहीं, कार्यक्रम प्रबंधक लाइव डैशबोर्ड के माध्यम से अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम की प्रगति और उसके परिणामों की निगरानी कर सकेंगे।
बता दें कि ‘RSSDI विश्वास’ के तहत कई भाषाओं में वीडियो तैयार किए गए हैं। इनमें दैनिक स्वयं देखभाल, आहार-पोषण और मधुमेह से होने वाली जटिलताओं से बचाव से जुड़ी जानकारी आसान भाषा में दी गई है। ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता इन वीडियो का इस्तेमाल मरीजों को बीमारी के बारे में समझाने और शिक्षित करने के लिए करेंगे।
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