आरएसएस को लेकर दिग्विजय सिंह के बयान पर कांग्रेस में सियासी संग्राम

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह द्वारा आरएसएस और भाजपा की प्रशंसा किए जाने वाले बयान ने पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी है। दिग्विजय ने अपने बयान पर सफाई दी है और कहा है कि वे संघ की विचारधारा के कट्टर विरोधी हैं। बावजूद इसके, उनके इस बयान पर पार्टी के नेताओं के विचार अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं।
शनिवार को दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी की एक तस्वीर साझा की थी। उन्होंने इस तस्वीर के साथ लिखा कि भाजपा-आरएसएस संगठन अपने कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री जैसे उच्च पदों तक पहुंचने का अवसर प्रदान करता है। तस्वीर में पीएम मोदी जमीन पर बैठे दिखाई दे रहे थे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इस पर आरएसएस की आलोचना की और इसे महात्मा गांधी की हत्या में शामिल नाथूराम गोडसे से जोड़ते हुए कहा कि संघ से सीखने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने कहा, "गोडसे के लिए कुख्यात संगठन गांधी द्वारा बनाए संगठन को क्या सिखा सकता है?"
वहीं कांग्रेस नेता मनिकम टैगौर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि गोडसे के संगठन से केवल नफरत ही सीखी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि 140 साल पुरानी कांग्रेस अब भी युवाओं को नफरत के खिलाफ लड़ना सिखाती है। टैगौर ने इसके साथ एक फुटबॉल मैच का वीडियो भी साझा किया, जिसमें गोल पोस्ट में गोल करने वाले खिलाड़ी को दिखाया गया और इसे मज़ाक में 'सेल्फ गोल' कहा।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने दिग्विजय सिंह का समर्थन किया और कहा कि वे चाहते हैं कि पार्टी मजबूत और अनुशासित हो। थरूर ने यह भी कहा कि पार्टी का 140 साल का इतिहास हमें बहुत कुछ सिखाता है और अनुशासन इसका अहम हिस्सा है।
पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा द्वारा बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किए जाने की निंदा की और कहा, "हमें आरएसएस से सीखने की जरूरत नहीं है। हमने स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश राज के अन्याय के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा किया। इसलिए, लोग कांग्रेस से सीखें, हमें किसी से नहीं।"
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