‘राहुल गांधी की ब्रिगेड का काम हंगामा करना’, रिजिजू ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

HIGHLIGHTS
- रिजिजू ने कांग्रेस पर संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाया।
- अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना।
- कांग्रेस सांसदों के व्यवहार को लेकर उठाए सवाल।
संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामे और नारेबाजी को लेकर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसदों पर चर्चा से बचने, सदन में हंगामा करने और अपशब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर भी विपक्षी सांसदों पर निशाना साधा।
मानसून सत्र के बर्बाद होने पर क्या कहा?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जब कोई व्यक्ति काम नहीं करने का मन बना लेता है तो उसे समझाने की कोशिश का कोई असर नहीं होता। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति कांग्रेस पार्टी की वजह से बनी है। सरकार बच्चों की बात नहीं कर रही है कि उन्हें खींचकर लाकर जबरन बैठाया जा सके। अधिकतम उनसे अनुरोध या अपील ही की जा सकती है।
रिजिजू ने कहा कि सरकार ने कांग्रेस से बार-बार संसद में आने और बहस में हिस्सा लेने को कहा, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनके मुताबिक, ऐसा लगता है कि कांग्रेस सांसद अपनी भूमिका सिर्फ हंगामा करने, चिल्लाने और अपशब्दों का इस्तेमाल करने तक सीमित मानते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोई सांसद केवल हंगामा करना चाहता है तो उसके लिए सांसद बने रहने की जरूरत नहीं है, वह सड़क पर जाकर प्रदर्शन कर सकता है। उनका कहना था कि कांग्रेस सांसदों ने मान लिया है कि उनका काम अपनी बात रखना नहीं, बल्कि हंगामा और अपशब्दों का इस्तेमाल करना है।
अमित शाह से बयान की मांग पर रिजिजू का जवाब
संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की कांग्रेस की मांग पर रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस संसद का सामना करने से डर गई और इसी कारण उसने चर्चा से बचने का बहाना बनाया। उन्होंने कहा कि सरकार हर सवाल का जवाब देने और स्थिति से जुड़ी सभी जानकारी देने के लिए तैयार थी, लेकिन कांग्रेस सच्चाई का सामना करने की स्थिति में नहीं थी।
अमित शाह के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार पहले दिन से चर्चा चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनके अनुसार, संसद का सत्र शुरू होने से पहले ही नारेबाजी शुरू कर दी गई थी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई सांसद उनसे संसद चलाने के लिए कुछ करने की बात कहते हैं। इस पर वह उनसे कहते हैं कि राहुल गांधी से बात करें, क्योंकि संसद में कांग्रेस के सदस्य वही करते हैं जो राहुल गांधी कहते हैं।
‘राहुल गांधी की ब्रिगेड का काम हंगामा करना’
रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस के कई सांसद उनके पास आकर यह शिकायत कर चुके हैं कि संसद में चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एक ‘ब्रिगेड’ बना रखी है, जिसका काम हंगामा करना और गालियां देना है। उनके मुताबिक, जो सांसद अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें नारेबाजी करने वालों का समर्थक बनाकर छोड़ दिया गया है।
राहुल गांधी के उस दावे पर कि सरकार जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर जवाबदेही तय करने के लिए तैयार नहीं है, रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के सदन के अंदर के व्यवहार को सभी ने देखा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या वह विपक्ष के नेता जैसे नजर आते हैं।
रिजिजू ने कहा कि उन्हें राहुल गांधी से कोई व्यक्तिगत समस्या नहीं है और दोनों बातचीत भी करते हैं तथा मिलते भी हैं। हालांकि, उनके मुताबिक विपक्ष के नेता को अपने पद की गरिमा और सम्मान के अनुरूप सदन में व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिस तरह की शैली अपनाई है, उनके सांसद भी उसी तरह व्यवहार करने लगे हैं।
राहुल गांधी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर टिप्पणी को लेकर रिजिजू ने कहा कि उन्होंने नाटकीय अंदाज में प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने की कोशिश की, लेकिन अंत में वह खुद मजाक का पात्र बन गए। उनके अनुसार, इससे राहुल गांधी की छवि और व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचा है।
समाजवादी पार्टी के इस आरोप पर कि सरकार कथित राम मंदिर चढ़ावा मामले और अन्य मुद्दों पर चर्चा से बच रही थी, रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्र आंदोलन पर चर्चा के लिए तैयार थी। उन्होंने कहा कि सभी मुद्दों पर एक साथ चर्चा नहीं की जा सकती।
‘दिमागी नक्सल’ विवाद पर क्या बोले रिजिजू?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर हुए विवाद पर रिजिजू ने कहा कि एक तरह से कांग्रेस पार्टी खुद को माओवादी और नक्सली संगठन में बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में इस तरह की विचारधारा रखने वाले लोगों का प्रभाव था, लेकिन अब पूरी कांग्रेस पार्टी माओवादी पार्टी में बदलती हुई दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले ही मुस्लिम लीग जैसी बन चुकी है और अब माओवादी पार्टी बनने की दिशा में भी बढ़ रही है। रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान का यही मतलब है।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी कह चुके हैं कि माओवाद और नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं और इन्हें खत्म करना जरूरी है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के खिलाफ हथियार उठाकर लड़ने वाले नक्सलियों को काफी हद तक खत्म किया गया है, लेकिन उनकी विचारधारा शहरी क्षेत्रों में अभी भी मौजूद है और उससे भी निपटना जरूरी है।
रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस को लगा कि यह टिप्पणी उसके बारे में है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद का मतलब क्या है और ‘दिमागी नक्सल’ से उनका आशय किन लोगों से है। उनके अनुसार, इनमें वे लोग शामिल हैं जो देश को टुकड़ों में बांटने की बात करते हैं, अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं या पूर्वोत्तर को अलग करने की मांग करते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों में उन परिवारों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होती, जिनके सदस्य नक्सलवाद का शिकार होते हैं। रिजिजू ने सेना, सीआरपीएफ, एसएसबी, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एनएसजी के जवानों का जिक्र करते हुए कहा कि माओवादी और ‘बौद्धिक नक्सली’ जवानों के मारे जाने पर जश्न मनाते हैं। उन्होंने कहा कि यही उनका ‘दिमागी नक्सल’ से आशय है और यह सोचकर हैरानी होती है कि क्या कांग्रेस भी इसी विचारधारा को मानती है।
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