झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म, सरकार ने निष्पक्ष जांच का दिया भरोसा
By Hitesh — August 18, 2026

HIGHLIGHTS
- छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने सभी मांगें स्वीकार करने का दावा किया।
- IAS अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में सुधारों के लिए समिति गठित होगी।
- सभी हितधारकों से चर्चा के बाद सुधारों का मसौदा तैयार किया जाएगा।
Author: — Dainik Dehat
झारखंड सरकार में मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने छात्र नेताओं का अनशन समाप्त कराने के बाद मीडिया से कहा कि राज्य में शुरू हुए महत्वपूर्ण छात्र आंदोलन, खासकर सुधारों से जुड़े आंदोलन को लेकर सरकार हमेशा संवेदनशील रही है। मुख्यमंत्री आंदोलन की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं और राहुल गांधी ने भी छात्रों के हितों की लगातार वकालत की है।
निष्पक्ष जांच का भरोसा, IAS अमिताभ कौशल की समिति करेगी सुधारों का मसौदा तैयार
दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि सरकार छात्र आंदोलनकारियों को धन्यवाद देना चाहती है। उन्होंने कहा कि राज्य और छात्रों के हित में शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से चलाया गया आंदोलन अब गरिमापूर्ण तरीके से समाप्त हो रहा है। सरकार ने आंदोलनकारियों की सभी मांगें स्वीकार कर ली हैं और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री पहले ही आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित करने की घोषणा कर चुके हैं। सभी हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद झारखंड के छात्रों की ओर से प्रस्तावित सुधारों का मसौदा तैयार किया जाएगा। इससे ऐसा मॉडल तैयार करने का प्रयास होगा, जिसका पूरे देश में अनुकरण किया जा सके।
छात्र आंदोलनकारियों की मांगों पर मंत्री ने क्या कहा?
दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि सरकार ने छात्र आंदोलनकारियों की ओर से उठाए गए सभी बिंदुओं को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि हठधर्मिता की भी एक सीमा होती है और मांगें ऐसी होनी चाहिए, जिन्हें सरकार वास्तव में पूरा कर सके।
उन्होंने बताया कि छात्र आंदोलन शुरू होने से पहले ही देवेंद्र महतो ने सीआईडी जांच का प्रस्ताव रखा था। सरकार ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी थी।
सीबीआई जांच के सवाल पर सरकार का जवाब
केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने के सवाल पर दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) परिणाम देने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि सीबीआई के पास पेपर लीक से जुड़े 17 मामले लंबित हैं।
मंत्री के अनुसार, वर्ष 2015 से देशभर में पेपर लीक और हेराफेरी की 152 घटनाएं हुई हैं, लेकिन केंद्र सरकार या केंद्रीय एजेंसियां इन मामलों में कोई ठोस परिणाम हासिल नहीं कर सकी हैं।
उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच के मामले में सरकार ने समय सीमा तय की है। 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल किया जाना चाहिए और मामलों में जल्द निर्णय के लिए त्वरित सुनवाई भी होनी चाहिए।
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