बार काउंसिल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का निर्देश, SC बोला- एकाधिकार खत्म होना चाहिए

HIGHLIGHTS
- महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी।
- दो महिला सदस्यों की नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश दिए गए।
- महिला आरक्षण व्यवस्था में 20% सीटें चुनाव और 10% सीटें सह-चयन से भरने का प्रावधान है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बार काउंसिलों को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि ये संस्थाएं धीरे-धीरे ‘पुरुषों के क्लब’ में बदलती जा रही हैं और इनके कामकाज पर किसी तरह के एकाधिकार को खत्म किया जाना चाहिए।
अदालत ने क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश दिया कि वे प्रत्येक राज्य बार काउंसिल में दो सह-चयनित महिला सदस्यों की नियुक्ति करें। इनमें एक पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश और दूसरी वरिष्ठ महिला अधिवक्ता होंगी, जिनकी बार में अच्छी प्रतिष्ठा हो।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और राज्य बार काउंसिलों के चुनाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “बार काउंसिल पुरुषों के क्लब बन गए हैं। हम देख सकते हैं कि लोग इसे एकाधिकार की तरह लेते हैं। इसे पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए।”
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिलों में महिला प्रतिनिधित्व पर दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य बार काउंसिल में नियुक्त की जाने वाली दो सह-चयनित महिला सदस्यों में एक पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश और दूसरी वरिष्ठ महिला अधिवक्ता होंगी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सह-चयनित सदस्य ऐसे होने चाहिए, जिनका चुनाव प्रक्रिया से कोई संबंध न हो, ताकि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा सकें।
अदालत ने कहा कि सह-चयन के मामले में पहले भी 10 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का ध्यान रखा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य बार काउंसिल चुनाव में असफल रहने वाली महिला उम्मीदवार को सह-चयन के लिए विचार करने से अयोग्य नहीं माना जाएगा।
मामला जस्टिस सुधांशु धूलिया की समिति को सौंपा गया
महिला उम्मीदवारों के लिए स्थानांतरित मतों के निर्धारण से जुड़े मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय पर्यवेक्षी समिति को भेज दिया।
समिति को निर्देश दिया गया है कि वह बार के सदस्यों से सुझाव मांगे और उन्हें मौखिक सुनवाई का अवसर देने के बाद इस संबंध में प्रक्रिया पर दोबारा विचार करे।
महिलाओं को मिलेगा 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और देशभर की राज्य बार काउंसिलों के चुनावों की निगरानी के लिए पहले ही एक उच्चस्तरीय पर्यवेक्षी समिति का गठन किया था।
यह मामला राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू करने से जुड़ा है। इसके तहत महिलाओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया जाना है। इसमें 20 प्रतिशत सीटें चुनाव के जरिए और बाकी 10 प्रतिशत सीटें सह-चयन प्रक्रिया से भरी जाएंगी।
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