हिमाचल के चंबा-कांगड़ा में भूकंप के कई झटके, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग

HIGHLIGHTS
- भरमौर में शाम 6:54 बजे आया पहला झटका
- भूकंप का केंद्र करेरी के पास 5 किलोमीटर की गहराई में था
- भरमौर में 7:40 और 7:43 बजे भी कंपन महसूस हुआ
हिमाचल प्रदेश के चंबा और कांगड़ा जिलों में मंगलवार शाम भूकंप के कई झटके महसूस किए गए। झटकों के बाद लोगों में दहशत फैल गई और वे एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, प्रशासन की ओर से जान-माल के किसी नुकसान की सूचना नहीं दी गई है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, चंबा के भरमौर क्षेत्र में मंगलवार शाम 6:54 बजे पहला भूकंप आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र करेरी के पास 5 किलोमीटर की गहराई में था। इसके बाद भरमौर में शाम 7:40 बजे और 7:43 बजे भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। करीब 45 मिनट बाद कांगड़ा जिले में भी मध्यम तीव्रता का एक और भूकंप दर्ज किया गया।
कांगड़ा में आए भूकंप की गहराई भी 5 किलोमीटर थी। झटके महसूस होते ही घरों में रखा सामान हिलने लगा। लोग तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए और कुछ समय तक बाहर रहे। एडीएम चंबा अमित मेहरा ने बताया कि जिले में किसी के हताहत होने या नुकसान की सूचना नहीं है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
चंबा और कांगड़ा जिले भूकंपीय क्षेत्र V में आते हैं। इसे उच्च-क्षति-जोखिम वाले क्षेत्र के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। भूकंप की उथली गहराई के कारण झटके ज्यादा महसूस हुए। अधिकारियों के अनुसार, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति की निगरानी कर रही हैं।
लोगों में दहशत
भरमौर में करीब एक घंटे के भीतर तीन बार झटके महसूस होने से लोगों की चिंता बढ़ गई। अचानक हुए कंपन के बाद लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। कुछ समय तक लोग एक-दूसरे से भूकंप को लेकर जानकारी लेते रहे। स्थिति सामान्य होने के बाद लोग वापस अपने घरों में लौटे।
क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर निकलने का रास्ता खोजती है और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
जानें क्या है भूकंप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहा जाता है, जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल के कारण भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति जैसे-जैसे दूर होती जाती है, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे में झटका तेज हो सकता है। हालांकि, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर की ओर है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूकंप की जांच रिक्टर स्केल से की जाती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से निकलने वाली ऊर्जा की तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।
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