फ्लोरिश स्टे होटल अग्निकांड: जांच रिपोर्ट में एमसीडी और पुलिस की लापरवाही उजागर
By Hitesh — July 28, 2026

HIGHLIGHTS
- फ्लोरिश स्टे होटल अग्निकांड की जांच में प्रशासनिक लापरवाही सामने आई।
- एमसीडी और पुलिस अधिकारियों के जवाब सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए।
- जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई।
Author: — Dainik Dehat
नई दिल्ली: मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में हुए अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट में प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही और हादसे से जुड़ी अहम जानकारियां छिपाने के प्रयासों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नगर निगम (एमसीडी) के कुछ इंजीनियरों और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने जांच के दौरान ऐसे जवाब दिए, जो उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे जांच को गुमराह करने और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की गई।
अवैध निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड पर उठे सवाल
जांच रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी जोन के सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार राय ने अपने लिखित जवाब में कहा कि होटल भवन को कभी अवैध निर्माण के मामले में चिन्हित नहीं किया गया और न ही उसके खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई थी।
हालांकि, कार्यकारी अभियंता के अभिलेखों की जांच में सामने आया कि वर्ष 2019 और 2020 में इसी भवन को दो बार अवैध निर्माण के मामले में बुक किया गया था और उसके खिलाफ ध्वस्तीकरण के आदेश भी जारी किए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के बावजूद यह जानकारी जांच टीम से साझा नहीं की गई।
दमकल के पहुंचने में देरी का भी जिक्र
रिपोर्ट में होटल के संचालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। जांच के अनुसार, हेल्थ ट्रेड लाइसेंस जय मिश्रा के नाम पर जारी था, जबकि होटल का संचालन लोकेश बजाज कर रहा था।
स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि आग सुबह करीब 8:15 बजे लगी, जबकि दमकल की पहली गाड़ियां लगभग 9:30 बजे मौके पर पहुंचीं। इस समय अंतराल की जांच कराने की भी सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पर्यटन विभाग ने होटल को सिल्वर कैटेगरी का दर्जा दिया था, जबकि कई कमरों में न तो खिड़कियां थीं और न ही पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था थी।
घटनास्थल से बरामद दो जले हुए डीवीआर को डेटा रिकवरी के लिए एफएसएल, रोहिणी भेजा गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इनसे हादसे से पहले और उसके दौरान की गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
पुलिस के जवाबों पर भी रिपोर्ट में सवाल
मजिस्ट्रियल जांच में दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। तत्कालीन एसएचओ वीरेंद्र दलाल ने जांच में कहा कि होटल के खिलाफ पहले कभी कोई शिकायत नहीं मिली थी।
लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, 14 अक्टूबर 2019 को मालवीय नगर थाने से ही होटल के संबंध में एक शिकायत एमसीडी को भेजी गई थी।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान एसएचओ विनय यादव ने वर्ष 2020 में होटल संचालक के खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 296/2020 का जिक्र अपने जवाब में नहीं किया। जांच अधिकारी ने इसे गंभीर चूक माना है।
इसके अलावा रिपोर्ट में बताया गया है कि होटल का हेल्थ ट्रेड लाइसेंस करीब पांच महीने तक लंबित रहने के बाद आग लगने से एक दिन पहले, यानी 2 जून को मंजूर किया गया। जांच रिपोर्ट में इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की सिफारिश की गई है।
इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश
एमसीडी: कार्यकारी अभियंता जेएस यादव, सहायक अभियंता सुनील चौहान, सहायक अभियंता यशवंत सिंह और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार राय।
दिल्ली पुलिस: तत्कालीन एसएचओ वीरेंद्र दलाल, युद्धवीर सिंह, सतीश राणा तथा वर्तमान एसएचओ विनय यादव।
अन्य विभाग: बीएसईएस के अधिकारी रजनेश कुमार रेखी और पर्यटन विभाग की निरीक्षण समिति के संबंधित सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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