UNGA में भारत ने OIC को सुनाई खरी-खरी, पाकिस्तान और PoK के आतंकी ढांचे पर उठाए सवाल

HIGHLIGHTS
- UNGA की छठी समिति की बैठक में भारत ने OIC की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।
- पश्चिम त्रिपुरा के सांसद बिप्लब कुमार देब ने भारत का पक्ष रखा।
- भारत ने पाकिस्तान और PoK में मौजूद आतंकी ढांचे का मुद्दा उठाया।
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की छठी समिति की बैठक में भारत ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई। भारत ने पाकिस्तान और गुलाम कश्मीर में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ की गई सटीक कार्रवाई को लेकर OIC की ओर से की गई टिप्पणियों को खारिज कर दिया।
पश्चिम त्रिपुरा से लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देब ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने OIC पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बेहद अफसोस की बात है कि संगठन के बयान देने वाले लोग यह भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि आतंकवाद के लिए जिम्मेदार कौन है और उसका शिकार कौन हुआ है।
भारत ने OIC के बयान पर जताई आपत्ति
बिप्लब कुमार देब ने कहा कि OIC का अध्यक्ष पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की लक्षित और मापी गई कार्रवाई पर टिप्पणी कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन्हीं ठिकानों से भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाई और उन्हें निर्देशित किया जाता रहा है।
जम्मू-कश्मीर को लेकर OIC पर पलटवार
बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर OIC की ओर से की गई 'अनावश्यक टिप्पणियों' पर भी आपत्ति जताई। भारत ने OIC से कहा कि उसे पाकिस्तान के अवैध कब्जे और खास तौर पर रावलाकोट जैसे क्षेत्रों में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन पर ध्यान देना चाहिए।
'सच्चाई और फिक्शन में फर्क भूल गया OIC'
सांसद बिप्लब कुमार देब ने OIC की आलोचना करते हुए कहा कि संगठन के बयान देने वाले लोग आतंकवाद के लिए जिम्मेदार लोगों और उसके पीड़ितों के बीच अंतर तक नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रावलाकोट में खुलेआम निर्मम हत्याएं और हिंसा हो रही है तथा वहां के लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। देब ने कहा कि OIC की इस तरह की जानबूझकर दिखाई गई अंधी उनकी कट्टरता को दर्शाती है।
आतंकवाद में 'अच्छा या बुरा' का भेद नहीं
अपने संबोधन में भारतीय सांसद ने सीमा पार आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र किया।
देब ने कहा कि पहलगाम हमला भारत की संप्रभुता पर एक सुनियोजित प्रहार था। उनके मुताबिक, इस हमले को ऐसे नेटवर्कों ने अंजाम दिया, जिन्हें पश्चिमी सीमा पार से सरकारी संरक्षण, सुरक्षित ठिकाने और रसद सहायता मिलती रही है।
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