इंदिरा गांधी को आपातकाल की गलती का एहसास था? सोनिया गांधी के बयान पर अठावले का पलटवार

HIGHLIGHTS
- सोनिया गांधी के बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
- केंद्रीय मंत्री और एनडीए नेता रामदास अठावले ने इस बयान पर सवाल उठाए।
- अठावले ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इंदिरा गांधी ने खुद कभी ऐसा बयान दिया था।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने हाल ही में आपातकाल को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को बाद में इस बात का एहसास हुआ था कि आपातकाल लागू करने का उनका फैसला गलत था। सोनिया गांधी के इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा लगातार कांग्रेस पर निशाना साध रही है। अब केंद्रीय मंत्री और एनडीए के सहयोगी रामदास अठावले ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनिया गांधी के बयान पर सवाल खड़े किए हैं।
रामदास अठावले ने सोनिया गांधी के बयान पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि सोनिया गांधी ने अब स्वीकार किया है कि आपातकाल लागू करने का फैसला संविधान के खिलाफ था और उस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था।
अठावले ने कहा, 'यह अलग बात है कि सोनिया गांधी ने कहा है कि इंदिरा गांधी को बाद में एहसास हुआ था कि आपातकाल लगाने का उनका फैसला गलत था। हालांकि, मुझे नहीं लगता कि इंदिरा गांधी ने खुद कभी ऐसा कोई बयान दिया था। लेकिन उस दौरान लोकतंत्र को कमजोर किया गया था।'
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, 'अगर सोनिया गांधी ने आज यह बात कही है, तो यह अच्छी बात है कि उन्होंने स्वीकार किया है कि इंदिरा गांधी का आपातकाल लगाने का फैसला सही नहीं था।'
सोनिया गांधी ने आपातकाल को लेकर क्या कहा था?
दरअसल, अपनी किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' के लॉन्च से पहले सोनिया गांधी ने समाचार पत्र द हिंदू को एक इंटरव्यू दिया था। इस बातचीत में उन्होंने आपातकाल के दौर और उस समय के राजनीतिक हालात पर अपनी राय रखी थी।
सोनिया गांधी ने कहा था, 'इंदिरा गांधी तेजी से बिगड़ती परिस्थितियों से निपटने की कोशिश कर रही थीं। उस समय हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन को आग के हवाले किया जा रहा था। बड़े पैमाने पर संगठित अशांति फैली हुई थी। यहां तक कि नौकरशाही और सशस्त्र बलों से सरकारी आदेशों की अवहेलना करने की अपील भी की गई थी।'
उन्होंने यह भी कहा कि आपातकाल लगाने के फैसले से पैदा हुई स्थिति का समाधान अंततः लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए ही निकाला गया।
सोनिया गांधी के मुताबिक, 'आज पीछे मुड़कर देखने पर हम उन घटनाओं को बेहतर नजरिये से समझ सकते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि खुद इंदिरा गांधी ने हालात को समझा और मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला किया। आप अच्छी तरह जानते हैं कि उन्होंने बाद में सार्वजनिक रूप से इमरजेंसी के दौरान हुई ज्यादतियों पर खेद जताया और माफी भी मांगी थी।'
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