बस्तर में जवानों के बीच पीएम मोदी ने मनाई दिवाली, बोले- देश ने नक्सलवाद के खिलाफ जीती जंग

HIGHLIGHTS
- उन्होंने पिछली सरकारों पर नक्सलवाद की समस्या को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
- प्रधानमंत्री ने 2010 के दंतेवाड़ा हमले में CRPF के 76 जवानों और 44 निर्दोष नागरिकों की मौत का जिक्र किया।
- पीएम मोदी ने हथियारबंद नक्सलियों के बाद 'दिमागी नक्सलियों' को लेकर भी चेतावनी दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ त्योहार मनाया। इस दौरान सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ मिली कामयाबी को देश की बड़ी उपलब्धि बताया। पीएम मोदी ने कहा कि साल 2026 की दिवाली कई मायनों में खास है, क्योंकि भारत ने दशकों से चली आ रही नक्सलवाद की लड़ाई में जीत हासिल की है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर जवानों के साथ दिवाली मनाने की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं। इसके साथ उन्होंने लिखा, "मैंने बस्तर में हमारे बहादुर सुरक्षा बलों के साथ इस तरह दिवाली मनाई।"
1. नक्सलवाद से मुक्त हुआ हर जिला, अब खत्म हुआ डर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि 2026 की दीपावली देश के लिए इसलिए विशेष है, क्योंकि भारत ने नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय से जारी संघर्ष में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि यह पहली दिवाली है, जब देश का कोई भी जिला नक्सलवाद से प्रभावित नहीं है।
इस उपलब्धि के लिए पीएम मोदी ने सुरक्षा बलों के जवानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह बड़ी सफलता जवानों के अदम्य साहस, समर्पण और मेहनत का नतीजा है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि नक्सलवाद का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए अभी भी सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का प्रत्येक सैनिक उनके परिवार का हिस्सा है।
2. 47 साल में पहली बार एक साल में CRPF का कोई जवान शहीद नहीं हुआ
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और सही रणनीति के साथ दुश्मनों का मुकाबला करना जरूरी है। उन्होंने कहा, ''देश को आगे ले जाने के लिए हमें मजबूत इरादों और सही रणनीति के साथ देश के दुश्मनों का सामना करना होगा और उन्हें हराना होगा। ऐसा करने के लिए देश में जिस राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी, उसे 2014 में मजबूती मिली। आपने इस प्रधानसेवक को मां भारती की सेवा करने का अवसर दिया और हमने देखा कि 2014 के बाद हालात कैसे बदलने लगे।''
पीएम मोदी ने कहा कि पहले लंबे समय तक ऐसी स्थिति रही, जब नक्सलियों के मुकाबले सुरक्षा बलों के अधिक जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ती थी। उन्होंने कहा, ''लंबे समय तक हमने देखा कि नक्सलियों के मुकाबले हमारे ज्यादा जवान बलिदान हो रहे थे। लेकिन 47 साल में पहली बार एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान बलिदान नहीं हुआ। यह देश की सही नीतियों और मजबूत इरादों की जीत है। यह आप सभी के शौर्य, साहस और संयम की जीत है।''
3. पिछली सरकारों ने नक्सलवाद को ऐसी समस्या माना जिसका कोई समाधान नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2004 से 2013 के आंकड़ों पर नजर डालने से पता चलता है कि हर साल नक्सलियों के मारे जाने की तुलना में सुरक्षा बलों के जवानों के बलिदान की संख्या अधिक थी। उन्होंने कहा, ''दुर्भाग्य से, उस समय की सरकारों ने नक्सलवाद को ऐसी बीमारी मान लिया था, जिसका कोई इलाज नहीं है। उन्होंने इस समस्या को ऐसे ही छोड़ दिया। दुश्मनों के सामने यह सोचकर बैठ जाना कि हालात ऐसे ही चलते रहेंगे, किसी भी देश के लिए सही नहीं हो सकता है।''
पीएम मोदी ने कहा कि माओवादी आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई बेहद चुनौतीपूर्ण रही है। नक्सलियों ने लोगों को उनके मतदान के अधिकार से भी वंचित कर दिया था। उन्होंने बताया कि एक साल में नक्सली हमलों की संख्या 2,000 तक पहुंच गई थी।
प्रधानमंत्री ने 2010 में दंतेवाड़ा में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, ''2010 में पास के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के दौरान सीआरपीएफ के हमारे 76 जवान बलिदान हो गए थे। उसी साल दंतेवाड़ा में हुई एक अन्य घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी।''
उन्होंने आगे कहा, ''यह धरती हमारे बहादुर जवानों के खून से लाल हो गई थी। लेकिन महलों में रहने वाले उन प्रभावशाली नेताओं की ओर से दुख जताने वाली एक आवाज तक नहीं आई। उनकी आंखों से एक आंसू तक नहीं निकला। लगभग हर दिन कहीं न कहीं ऐसे हमले होते रहे। यह सिलसिला दशकों तक चलता रहा। इस दौरान अकेले छत्तीसगढ़ में 1,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए।''
4. हथियारबंद नक्सलियों के बाद अब 'दिमागी नक्सलियों' को लेकर चेताया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जंगलों में सक्रिय हथियारबंद माओवादियों का सफाया हो चुका है, लेकिन अब 'दिमागी नक्सलियों' से खतरा बना हुआ है। उनके मुताबिक, ऐसे तत्व कई राजनीतिक दलों और संगठनों में अपनी जगह बना चुके हैं।
पीएम मोदी ने कहा, ''दोस्तों, इन सफलताओं के बीच हमें एक और बात ध्यान में रखनी होगी। हथियारबंद नक्सलियों का सफाया हो चुका है, लेकिन 'दिमागी नक्सलियों' ने विभिन्न संगठनों पर नियंत्रण कर लिया है। वे आज भी लोगों को संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ भड़काने में जुटे हैं। इन विचारधारा से प्रेरित नक्सलियों ने कई राजनीतिक दलों और अलग-अलग संगठनों में घुसपैठ कर ली है। हमें उनकी पहचान करनी होगी, उन्हें परास्त करना होगा और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।''
5. पिछले 12 वर्षों में 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के विकास के लिए किए गए प्रयासों का असर शांति और सुरक्षा पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ संघर्ष के साथ-साथ गरीबी के मोर्चे पर भी बड़ी सफलता हासिल की है।
पीएम मोदी ने कहा, ''जब हम देश के लिए काम करते हैं, तो इससे देश में शांति और सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। पिछले 12 वर्षों में देश ने न केवल नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई जीती है, बल्कि गरीबी के खिलाफ भी बड़ी लड़ाई लड़ी है। इस साल दिवाली से ठीक पहले, कुछ दिन पहले विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं।''
उन्होंने आगे कहा, ''गरीबी हटाने के नारों के साथ दशकों में जो हासिल नहीं हो सका, वह देश ने सिर्फ 12 वर्षों में कर दिखाया है। सोचिए, यह कितनी बड़ी उपलब्धि है। दिवाली के दौरान हम रंगोली बनाते हैं। हमने भी कल्याणकारी योजनाओं की ऐसी रंगोली बनाई, जिसने लगातार गरीबों को सशक्त बनाने का काम किया।''
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