कांवड़ियों की आस्था का सम्मान हो, होटल-ढाबों पर जानकारी रहे स्पष्ट: मंत्री कपिल देव अग्रवाल

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा से पहले नेम प्लेट विवाद फिर चर्चा में, मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने ढाबों और रेस्टोरेंट पर सही जानकारी लिखने की बात कही।
- मंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान जरूरी है, खाने-पीने की चीजों को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।
- कांवड़ मार्ग पर आने वाले होटल-ढाबों में पारदर्शिता रखने की मांग, पिछले वर्षों की तरह इस बार भी मुद्दा सुर्खियों में आया।
मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर नेम प्लेट लगाने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल ने कहा है कि दुकानों और खाने-पीने की जगहों पर सही जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असमंजस की स्थिति का सामना न करना पड़े।
मंत्री ने गुरुवार शाम दिए बयान में कहा कि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी ढाबे का नाम धार्मिक प्रतीक से जुड़ा है और वहां मांसाहारी भोजन परोसा जाता है तो इसकी जानकारी साफ तौर पर लिखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की आस्था को ठेस पहुंचाने वाली स्थिति नहीं बननी चाहिए।
कांवड़ यात्रियों की सुविधा पर जोर
कपिलदेव अग्रवाल ने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने गंतव्य की ओर जाते हैं और मुजफ्फरनगर का रास्ता इस यात्रा का प्रमुख हिस्सा है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी परेशानी या भ्रम का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि यह विषय केवल कांवड़ यात्रा तक सीमित नहीं है। मुजफ्फरनगर से होकर जाने वाला मार्ग हरिद्वार, ऋषिकेश और बदरीनाथ जैसे धार्मिक स्थलों को जोड़ता है, जहां देशभर से लोग परिवार के साथ पहुंचते हैं।
धार्मिक यात्राओं में खान-पान को लेकर सतर्कता
मंत्री ने कहा कि कई लोग सामान्य दिनों में अलग तरह का भोजन करते हैं, लेकिन धार्मिक यात्राओं के दौरान वे सात्विक भोजन को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में होटल और ढाबों के नाम और वहां उपलब्ध भोजन को लेकर स्पष्टता होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रतिष्ठान में मिलने वाले भोजन को लेकर जानकारी पहले से स्पष्ट होगी तो श्रद्धालुओं को अपनी पसंद के अनुसार निर्णय लेने में आसानी होगी।
पहले भी चर्चा में रहा है नेम प्लेट मामला
गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा के दौरान होटल और ढाबों पर नेम प्लेट लगाने का मुद्दा पिछले वर्षों में भी काफी चर्चा में रहा था। इस बार यात्रा से पहले मंत्री के बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बन गया है।
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