कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में घमासान, शिवकुमार बोले- धैर्य रखें, सभी को मिलेगा मौका

HIGHLIGHTS
- कांग्रेस के कई वरिष्ठ विधायकों ने मंत्री पद नहीं मिलने पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
- कुछ जिलों के नेताओं ने कैबिनेट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का मुद्दा उठाया।
- डीके शिवकुमार ने अपने पुराने राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए नेताओं से धैर्य रखने को कहा।
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी के अंदर नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। मंत्री पद नहीं मिलने से कई वरिष्ठ विधायक और उनके समर्थक असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। कुछ नेताओं ने इस्तीफे तक के संकेत दिए हैं, वहीं कई स्थानों पर समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नाराज नेताओं से धैर्य बनाए रखने और पार्टी के फैसले का सम्मान करने की अपील की है।
कांग्रेस सरकार ने सोमवार को लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए 20 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने का फैसला किया। इसके बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि कई योग्य और वरिष्ठ नेताओं को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि पार्टी को कई पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसले लेने होते हैं।
शिवकुमार ने अपने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2004 में उन्हें भी मंत्री नहीं बनाया गया था और बाद में सिद्धारमैया सरकार के दौरान भी लंबे समय तक वह कैबिनेट से बाहर रहे। उन्होंने कहा कि धैर्य बनाए रखने के कारण ही वह आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने सभी नेताओं से संयम रखने की अपील की।
कैबिनेट विस्तार के बाद किन नेताओं ने जताई नाराजगी?
कैबिनेट में जगह नहीं मिलने पर छह बार के विधायक तनवीर सैत ने निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके समर्थक हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं और आगे का फैसला वह समर्थकों से चर्चा के बाद करेंगे।
वहीं पांच बार के विधायक हम्पनगौड़ा बादरली ने कहा कि रायचूर जिले को एक बार फिर मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
बंगलूरू के गोविंदराजनगर से विधायक प्रिया कृष्णा को भी मंत्री पद नहीं मिला। इसके बाद उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रिया कृष्णा और उनके पिता एम. कृष्णप्पा दोनों ही मंत्री पद की दौड़ में शामिल थे, लेकिन किसी को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई।
जिलों के प्रतिनिधित्व को लेकर भी उठे सवाल
कैबिनेट विस्तार के बाद कोलार, चिक्कबल्लापुर, गडग और विजयनगर जिलों के कांग्रेस विधायकों ने भी असंतोष जताया। उनका कहना है कि उनके क्षेत्रों को मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
कोलार और चिक्कबल्लापुर के विधायक इस मुद्दे पर बैठक करने की तैयारी में हैं। वहीं अन्य जिलों के नेताओं ने भी आरोप लगाया कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनके क्षेत्रों को नजरअंदाज किया गया। इससे पार्टी के अंदर क्षेत्रीय संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कैबिनेट विस्तार में कौन-से फैसले रहे चर्चा में?
कांग्रेस नेतृत्व ने इस विस्तार में अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। हालांकि वरिष्ठ नेता और विधायक बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का फैसला सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
वहीं शपथ ग्रहण से पहले अंतिम समय में मंकल एस. वैद्य का नाम सूची से हटाकर पूर्व मंत्री एस.एस. मल्लिकार्जुन को शामिल किए जाने से भी पार्टी के अंदर नाराजगी बढ़ी।
कुछ असंतुष्ट नेताओं ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की चेतावनी दी, जबकि एक कार्यकर्ता द्वारा विरोध में जहर खाने की खबर भी सामने आई। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सभी नेताओं से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में सभी को मौका देने का प्रयास किया जाएगा।
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