कश्मीर पर एर्दोगन के बयान को भारत ने किया खारिज, विदेश मंत्रालय ने रूस-चीन समेत कई मुद्दों पर दी जानकारी

HIGHLIGHTS
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दी जानकारी
- अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल की विदेश सचिव से मुलाकात
- प्रस्तावित टैरिफ के द्विपक्षीय संबंधों पर असर को लेकर भारत की चिंता
- अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर संभावित प्रभाव का भी मुद्दा
- अगला भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन रूस में होगा
विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को अमेरिका के टैरिफ, रूस के साथ प्रस्तावित शिखर बैठक, भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि, चीन के साथ रिश्ते, फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों और कश्मीर मुद्दे समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन सभी मामलों में भारत अपने हितों के साथ-साथ अपने नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है।
अमेरिकी टैरिफ पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
अमेरिकी टैरिफ से जुड़े सवाल पर रणधीर जायसवाल ने बताया कि अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने विदेश सचिव से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान कई मुद्दों पर बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि विदेश सचिव ने प्रस्तावित टैरिफ को लेकर भारत की उन चिंताओं को दोहराया, जिनका संबंध द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले असर से है।
भारत पहले भी अमेरिका के साथ व्यापार और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी रखने की बात कह चुका है। विदेश मंत्रालय की ओर से इस मामले में किसी तत्काल नए फैसले की जानकारी नहीं दी गई।
रूस के साथ अगला शिखर सम्मेलन कब होगा?
भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन को लेकर पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने कहा कि पिछला वार्षिक शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित हुआ था और भारत ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मेजबानी की थी। उन्होंने बताया कि अगली बैठक रूस में होगी, लेकिन अभी इसमें कुछ समय बाकी है।
उन्होंने कहा कि बैठक से जुड़ी जानकारी और कार्यक्रम तय होने के बाद इसकी जानकारी साझा की जाएगी। भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार जारी रहे हैं। विदेश मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में भी दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर नियमित बातचीत का उल्लेख किया गया है।
एर्दोगन के कश्मीर बयान पर भारत ने दिया जवाब
तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की ओर से संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने आपत्ति जताई। जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई इन टिप्पणियों को भारत खारिज करता है।
उन्होंने कहा कि यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा विषय है और इस मामले में किसी बाहरी पक्ष को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। कश्मीर को लेकर भारत का यह रुख नया नहीं है। विदेश मंत्रालय इससे पहले भी अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय बयानों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए बाहरी टिप्पणियों को खारिज करता रहा है।
गंगा जल संधि को लेकर भारत-बांग्लादेश में क्या हो रहा है?
भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि से जुड़े सवाल पर जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच साझा नदियों से संबंधित विषयों पर संयुक्त नदी आयोग के तहत चर्चा होती है। उन्होंने बताया कि गंगा जल संधि से संबंधित तकनीकी स्तर की बैठकें जारी हैं।
हालिया रिपोर्टों में भी विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा गया है कि 1996 की गंगा जल संधि से जुड़े नदी और जल संबंधी विषयों पर द्विपक्षीय तंत्र के तहत बातचीत होती है।
सीमा पार आतंकवाद पर जयशंकर का संदेश
विदेश मंत्री एस जयशंकर की न्यूयॉर्क में सीमा पार आतंकवाद को लेकर की गई टिप्पणी के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्री ने एक बार फिर इस मुद्दे को गंभीर चिंता का विषय बताया है।
जायसवाल ने कहा कि सभी देशों को मिलकर सीमा पार आतंकवाद समेत आतंकवाद के वैश्विक खतरे से निपटने के लिए काम करना चाहिए।
SCO में नए सदस्य को लेकर भारत ने क्या कहा?
शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की सदस्यता से जुड़े सवाल पर जायसवाल ने कहा कि किसी नए सदस्य को संगठन में शामिल करने का फैसला सभी सदस्य देश मिलकर करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदस्यता से जुड़ा कोई मुद्दा सामने आने पर आगे की प्रक्रिया के बारे में सदस्य देश सामूहिक रूप से निर्णय लेते हैं।
भारत-चीन संबंधों पर क्या बोला विदेश मंत्रालय?
भारत-चीन संबंधों को लेकर जायसवाल ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच नेताओं के स्तर पर बैठक हुई थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर मार्गदर्शन दिया था।
उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर उसी दिशा में आगे काम किया जा रहा है।
फारस की खाड़ी में 12 भारतीय जहाज, 163 भारतीय नाविक
फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों की स्थिति को लेकर विदेश मंत्रालय ने बताया कि फिलहाल वहां भारत के झंडे वाले छह वाणिज्यिक जहाज मौजूद हैं। इसके अलावा छह विदेशी झंडे वाले जहाज भी क्षेत्र में हैं, जो भारत के लिए माल लेकर जा रहे हैं। इस तरह कुल 12 जहाज भारत से जुड़े हुए हैं।
इन जहाजों पर करीब 163 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इसके अलावा क्षेत्र में संचालित अलग-अलग वाणिज्यिक जहाजों पर 4,500 से अधिक भारतीय नाविक भी तैनात हैं।
जायसवाल ने कहा कि जहाजरानी मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही और नाविकों की सुरक्षा पर नजर रख रहा है। जरूरत पड़ने पर भारतीय दूतावासों और अन्य संबंधित एजेंसियों के माध्यम से नाविकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए कदम उठाए जाते हैं।
IBSA बयान में फलस्तीन पर भारत का रुख
IBSA यानी भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों की बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में हुई थी। बैठक के बाद तीनों देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किया गया।
जायसवाल ने कहा कि इस बयान में आर्थिक, विकास और राजनीतिक मुद्दों पर तीनों देशों का सामूहिक दृष्टिकोण शामिल है। फलस्तीन को लेकर भारत के रुख पर उन्होंने कहा कि भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है।
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