आतंकवाद पर राजनाथ सिंह का सख्त संदेश, बोले- दोहरे मापदंड नहीं होंगे स्वीकार

HIGHLIGHTS
- राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के आर्थिक और सामाजिक नुकसान को रेखांकित किया।
- आतंकियों को फंडिंग और सुरक्षित ठिकाने देने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही।
- भारत ने 2026-2030 के बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम का समर्थन किया।
दुशान्बे। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने की जरूरत पर जोर दिया।
राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को शांति और विकास के समक्ष मौजूद सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता और इसके खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह का दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए।
आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने पर जोर
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में आतंकवाद के आर्थिक और सामाजिक दुष्प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद निर्दोष लोगों की जान लेने के साथ ही निवेश, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद समाज में कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है और युवाओं को उनके उचित अवसरों से वंचित करता है। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि आतंकवादियों को आर्थिक सहायता देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले देशों और संगठनों के लिए दुनिया में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी के तीन प्रमुख स्तंभ: सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर
राजनाथ सिंह ने बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखे गए विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों पर आधारित SCO को लेकर भारत का दृष्टिकोण सामने रखा था।
रक्षा मंत्री के अनुसार, ये तीनों स्तंभ एक-दूसरे को मजबूत बनाते हैं। सुरक्षा से निवेश को प्रोत्साहन मिलता है, जबकि कनेक्टिविटी व्यापार को सुगम बनाती है। वहीं, सुरक्षा और कनेक्टिविटी मिलकर आर्थिक विकास तथा रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि इन तीनों स्तंभों के माध्यम से मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के पुराने और मजबूत संबंधों को और अधिक गहरा किया जा सकता है।
राजनाथ सिंह ने कहा, "हम मध्य एशियाई देशों के साथ अपनी पुरानी दोस्ती और मजबूत संबंधों को बहुत महत्व देते हैं। बिश्केक में SCO समिति में हमारे नेताओं ने शंघाई सहयोग संगठन की 25वीं वर्षगांठ मनाई थी। यह हमारी साझा यात्रा की समीक्षा करने और भविष्य की दिशा पर चर्चा करने का एक अवसर था। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने SCO संगठन से सुरक्षा, सामूहिक सहयोग और अवसरों के मुद्दों पर ठोस कदम उठाने का आह्वान किया था। यह संदेश 'काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट' के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।"
इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2026 से 2030 तक के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना को अपनाने के भारत के समर्थन की भी पुष्टि की।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर चिंता
दुनियाभर में जारी संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनिश्चित बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा, "आज हम एक अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल के दौर में हैं। संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर रहे हैं। ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा हमारे लिए चिंता का विषय हैं। नई तकनीकें अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही हैं और साथ ही नई दूरियां भी पैदा कर रही हैं। ऐसी स्थिति में, SCO का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाएगा कि क्या वह कोई साझा आधार ढूंढ पाता है और उस पर काम कर पाता है या नहीं।"
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आर्थिक सहयोग को समावेशी बनाने के पक्ष में है, ताकि संगठन के प्रत्येक सदस्य देश को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने तथा विकास के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आर्थिक सहयोग से मिलने वाले लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचें।
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