शराब नीति केस: केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को दिल्ली HC से आखिरी मौका

HIGHLIGHTS
- दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को CBI की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अंतिम मौका दिया।
- वकीलों की हड़ताल के कारण गुरुवार को सुनवाई टल गई, अब मामले में अगली सुनवाई 17 और 18 अगस्त को होगी।
- CBI ने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को चुनौती दी है, जबकि कोर्ट ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर भी विचार किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने तीनों नेताओं को सीबीआई की याचिका पर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सीबीआई ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
वकीलों की हड़ताल के चलते नहीं हो सकी सुनवाई
जस्टिस मनोज जैन की पीठ के समक्ष गुरुवार को मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट के वकीलों के कार्य बहिष्कार के कारण आरोपियों की ओर से कोई अधिवक्ता अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई आगे बढ़ा दी।
अब मामले में सीबीआई की दलीलों पर सुनवाई के लिए 17 और 18 अगस्त की तारीख तय की गई है।
सीबीआई ने जल्द सुनवाई की मांग की
सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से मामले की जल्द सुनवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए पहले भी कई अवसर दिए जा चुके हैं और देरी के कारण मामला काफी समय से लंबित है।
इसके बाद अदालत ने कहा कि न्याय के हित में आरोपियों को जवाब दाखिल करने का एक अंतिम मौका दिया जा रहा है। यदि वे चाहें तो दो सप्ताह के अंदर अपना जवाब जमा कर सकते हैं।
अगस्त की तारीख पर कोर्ट ने क्या कहा?
तुषार मेहता ने सुनवाई के लिए जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत में तारीख देने का अनुरोध किया था। हालांकि, जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि सांसदों और विधायकों से जुड़े कई मामले पहले से लंबित हैं, इसलिए तुरंत समय देना संभव नहीं है। उन्होंने तारीख पहले करने की संभावना पर विचार करने की बात कही।
क्या है शराब नीति मामला?
दिल्ली की एक निचली अदालत ने 27 फरवरी 2026 को शराब नीति से जुड़े मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक समीक्षा के मानकों पर पर्याप्त मजबूत नहीं है।
इसके बाद सीबीआई ने 9 मार्च 2026 को इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले में आगे की सुनवाई शुरू की।
सुनवाई के दौरान उठा था जज बदलने का विवाद
मामले की सुनवाई के दौरान केजरीवाल और अन्य नेताओं ने तत्कालीन पीठ पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए न्यायाधीश को बदलने की मांग की थी। याचिका खारिज होने के बाद आप नेताओं ने कोर्ट को पत्र लिखकर सुनवाई में शामिल नहीं होने और गांधीवादी सत्याग्रह का रास्ता अपनाने की बात कही थी।
इसके बाद सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कोर्ट ने आप नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की और मामले को जस्टिस मनोज जैन की पीठ को भेज दिया गया।
हाईकोर्ट के वकील क्यों कर रहे हैं बहिष्कार?
दिल्ली हाईकोर्ट के वकील जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। प्रस्ताव के तहत जिला अदालतों की सीमा 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने की बात कही गई है। इसी विरोध के चलते 14 जुलाई से वकील काम का बहिष्कार कर रहे हैं, जिसका असर गुरुवार की सुनवाई पर भी पड़ा।
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