यूपी विधानसभा: हंगामे की भेंट चढ़ा मानसून सत्र, कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

HIGHLIGHTS
- विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मंगलवार की घटनाओं पर जताया दुख
- सपा विधायकों ने 6900 शिक्षक भर्ती और राम मंदिर मुद्दे पर किया प्रदर्शन
- अनुपूरक बजट चर्चा के दौरान सदन में हुआ जोरदार हंगामा
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मंगलवार को सदन में हुई घटनाओं पर दुख जताते हुए कहा कि वह इस बात पर गंभीरता से विचार करेंगे कि क्या वह इस पद के योग्य हैं।
विधानसभा अध्यक्ष के इस बयान के बाद सदन में कुछ समय के लिए गंभीर माहौल देखने को मिला।
इससे पहले विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी के विधायकों ने 6900 शिक्षक भर्ती और राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। सपा विधायक अतुल प्रधान दानपेटी लेकर विधानसभा पहुंचे और आरोप लगाया कि सरकार ने लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को सदन के साथ-साथ जनता के बीच भी उठाएगी।
अनुपूरक बजट चर्चा के दौरान विपक्ष का हंगामा
बुधवार को अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान भी विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे ही चर्चा के लिए खड़े हुए, सपा विधायकों ने राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी के मुद्दे पर पहले चर्चा कराने की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के इस रवैये को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि अनुपूरक बजट प्रदेश की 25 करोड़ जनता से जुड़ा विषय है और इसकी चर्चा का एजेंडा पहले से तय था।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का न तो चर्चा में विश्वास है और न ही संवैधानिक परंपराओं में।
दूसरे दिन भी हुआ था हंगामा
मंगलवार को भी इसी मुद्दे को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के दौरान सपा विधायक सचिन यादव द्वारा उनकी तस्वीर लहराने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना नाराज हो गए थे।
उन्होंने सचिन यादव को पूरे मानसून सत्र के लिए सदन से निष्कासित कर दिया था। विधानसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
निष्कासन के बाद सचिन यादव विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। उनके समर्थन में रागिनी सोनकर, अतुल प्रधान सहित 20 से अधिक सपा विधायक भी धरने में शामिल हुए।
बाद में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के समझाने के बाद सचिन यादव ने धरना खत्म कर दिया।
सदन में कई बार बाधित हुई कार्यवाही
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के कारण विधानसभा की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई। भाजपा और सपा विधायक आमने-सामने आ गए, जबकि महिला विधायक भी एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करती नजर आईं।
लगातार हंगामे के चलते विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
वहीं, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 59,019 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने सदन में चर्चा कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
पहले दिन भी विधान परिषद में हुआ था विवाद
यूपी विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को विधान परिषद में राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी के मुद्दे पर हंगामा हुआ था।
डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा था, "सूप बोले तो बोले, छलनी भी बोले, जिसमें बहत्तर छेद।" उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि सपा के लोग बाबर से रिश्तेदारी जोड़ते थे और 1990 में इन्हीं लोगों ने राम भक्तों की हत्या कराई थी।
इस बयान पर सपा MLC नाराज हो गए थे। वे अपनी कुर्सियां छोड़कर वेल में आ गए और 'चंदा चोर, गद्दी छोड़' के नारे लगाने लगे।
इसके जवाब में केशव मौर्य ने कहा था, "सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली है।"
वहीं, सपा विधायकों ने पलटवार करते हुए कहा था, "आप चढ़ावा चोरी करके हज को चले।"
इसके बाद केशव मौर्य ने कहा था कि अयोध्या में भव्य मंदिर देखकर विपक्ष की छाती फट रही है। उन्होंने कहा था कि मथुरा और काशी में भी मंदिर बनकर रहेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि विपक्ष ऐसे चिल्ला रहा है, जैसे उनका दिया हुआ पैसा चोरी हो गया हो।
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