मध्य प्रदेश में यूसीसी की दिशा में बड़ा कदम, कैबिनेट ने मसौदे को दी मंजूरी

HIGHLIGHTS
- मध्य प्रदेश कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे को मंजूरी दी, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे समान अधिकार और न्याय की दिशा में कदम बताया।
- यूसीसी में विवाह पंजीकरण अनिवार्य, बहुविवाह पर रोक, महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति में समान अधिकार समेत कई प्रावधान शामिल किए गए हैं।
- कैबिनेट ने यूसीसी के अलावा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, अग्निशमन सेवा, निजी विश्वविद्यालय संशोधन और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कई प्रस्तावों को भी मंजूरी दी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर में कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्यमंत्री सहित पूरी कैबिनेट और अधिकारी भोपाल से ई-बस के जरिए जगदीशपुर पहुंचे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रिटायर्ड न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई समिति द्वारा तैयार किए गए मसौदे को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से इस कानून का समर्थन करने की अपील भी की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 27 अप्रैल 2026 को गठित सात सदस्यीय समिति ने विभिन्न राज्यों के यूसीसी मॉडल, मौजूदा कानूनों और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन किया। लोगों से सुझाव लेने के लिए वेब पोर्टल तैयार किया गया, जिसे 22 मई 2026 को सार्वजनिक किया गया। इसके अलावा प्रदेशभर में जिला और राज्य स्तर पर 50 से अधिक जन-परामर्श बैठकें भी आयोजित की गईं।
सरकार के अनुसार, पोर्टल के माध्यम से 9,58,675 सुझाव मिले, जबकि बैठकों के जरिए 1,134 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। करीब 3.5 करोड़ एसएमएस भेजकर भी लोगों की राय ली गई। सरकार का दावा है कि मिले सुझावों में 93.54 प्रतिशत लोगों ने मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने का समर्थन किया।
इसके अलावा 92.20 प्रतिशत लोगों ने सभी समुदायों में महिलाओं और पुरुषों के लिए समान कानून की बात कही। 91.32 प्रतिशत लोगों ने भेदभावपूर्ण तलाक प्रावधानों को खत्म करने का समर्थन किया, जबकि 92.66 प्रतिशत लोगों ने महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति में समान अधिकार देने की बात कही।
यूसीसी में बहुविवाह पर रोक, विवाह पंजीकरण अनिवार्य
समान नागरिक संहिता में सभी समुदायों के लिए एक ही विवाह व्यवस्था यानी मोनोगैमी को अनिवार्य किया गया है। इसके तहत कोई व्यक्ति एक समय में केवल एक जीवित जीवनसाथी के साथ विवाह संबंध में रह सकेगा। विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है।
संहिता में बिना वैध सहमति और प्रतिबंधित रिश्तों में विवाह पर रोक का प्रावधान किया गया है। मौखिक तलाक और अनौपचारिक पंचायतों के फैसलों को गैर-कानूनी माना गया है। तलाक केवल कानून में तय वैधानिक आधारों के अनुसार ही हो सकेगा।
निकाह हलाला जैसी शर्तों को अपराध की श्रेणी में रखा
यूसीसी में विवाह और तलाक दोनों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। शहरी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया एमपी ई-नगर पालिका पोर्टल और ग्रामीण क्षेत्रों में एसडीएम, नगरपालिका या पंचायत के माध्यम से पूरी होगी।
संहिता में तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा विवाह के लिए निकाह हलाला जैसी शर्तों को मानने, बढ़ावा देने या किसी को मजबूर करने को दंडनीय अपराध माना गया है।
बच्चों को मिलेगा समान कानूनी दर्जा
यूसीसी में 'अवैध संतान' शब्द को समाप्त करने का प्रावधान किया गया है। विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार दिए जाएंगे। अभिरक्षा के मामलों में अदालत बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देगी।
उत्तराधिकार में बेटे-बेटियों को समान अधिकार
संहिता में संपत्ति के उत्तराधिकार में बेटे और बेटियों को समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। विधवा और विधुर के साथ भी समान व्यवहार किया जाएगा। जीवित माता और पिता को क्लास-1 उत्तराधिकारी माना गया है और उन्हें जीवनसाथी व बच्चों के साथ बराबर हिस्सा मिलेगा।
कोई भी वयस्क अपनी अर्जित या पैतृक संपत्ति की पूरी वसीयत अपनी इच्छा के अनुसार कर सकेगा। हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी व्यक्ति उत्तराधिकार के अधिकार से वंचित होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक माह में पंजीकरण जरूरी
यूसीसी के तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास बयान जमा करना होगा। दोनों पार्टनर की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए और वे पहले से विवाहित नहीं होने चाहिए।
यदि कोई पार्टनर 21 वर्ष से कम उम्र का है तो इसकी जानकारी उसके माता-पिता या अभिभावकों को भेजी जाएगी। लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा।
बिना पंजीकरण एक महीने से अधिक साथ रहने पर तीन महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। गलत जानकारी देने पर तीन महीने की जेल और 25 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी से बाहर रखा गया
मुख्यमंत्री ने बताया कि अनुसूचित जनजातियों, संरक्षित रूढ़िगत समुदायों और घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है। धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पद्धतियों और रीति-रिवाजों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
कैबिनेट में अन्य महत्वपूर्ण फैसलों को भी मंजूरी
कैबिनेट ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 को मंजूरी दी। इसके तहत कारोबार और निवेश से जुड़ी स्वीकृतियों को एक स्थान पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
इसके अलावा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक-2026 को भी स्वीकृति दी गई। इसमें आधुनिक आपातकालीन व्यवस्था और बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है।
निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 को भी मंजूरी दी गई। इससे निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया जाएगा।
चिकित्सा शिक्षा में बदलाव करते हुए एक मेडिकल यूनिवर्सिटी की जगह दो स्वास्थ्य विश्वविद्यालय बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। जबलपुर स्थित विश्वविद्यालय को विकसित कर चिकित्सा शिक्षा का विस्तार किया जाएगा।
सरकार ने राजमार्ग कानून में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत पुराने और अप्रासंगिक प्रावधानों को हटाकर आधुनिक जरूरतों के अनुसार नया कानून बनाया जाएगा।
इसके अलावा श्रम कानूनों में सुधार से जुड़े प्रस्ताव और पुराने अनुपयोगी कानूनों को समाप्त करने के फैसले को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी।
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