दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद नरोत्तम मिश्रा का बड़ा बयान, बोले- अब किसी पद की इच्छा नहीं

HIGHLIGHTS
- कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को छह हजार से ज्यादा वोटों से हराया।
- नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि उन्हें अब किसी राजनीतिक पद की इच्छा नहीं है।
- पूर्व गृहमंत्री के मतदान केंद्र पर भी कांग्रेस उम्मीदवार को भाजपा से ज्यादा वोट मिले।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को मात दे दी है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को छह हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में रही।
नरोत्तम मिश्रा दतिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। उन्होंने नामांकन पत्र भी लिया था, लेकिन पार्टी ने अंतिम समय में आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया। अब उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी राज्यसभा या लोकसभा जाने की इच्छा नहीं जताई थी। उनकी मांग सिर्फ विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट को लेकर थी, लेकिन पार्टी ने किसी अन्य उम्मीदवार को मौका दिया।
30 साल विधायक और 15 साल मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा
डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि वह 30 साल तक विधायक रहे हैं और पार्टी ने उन्हें 15 साल तक मंत्री रहने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति का अब पटाक्षेप हो चुका है।
उन्होंने आगे कहा कि अब उनकी किसी पद की इच्छा नहीं है। उनकी सिर्फ यही अपेक्षा है कि पार्टी उन्हें एक सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर काम करने का मौका देती रहे, जैसा कि पिछले ढाई वर्षों से मिलता आ रहा है।
नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर भी भाजपा को मिली हार
दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के दौरान कांग्रेस लगातार बढ़त बनाए हुए थी। इस बीच पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र का परिणाम भी चर्चा का विषय बना रहा। जिस बूथ को भाजपा का मजबूत क्षेत्र माना जाता था, वहां भी कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से ज्यादा वोट हासिल किए।
बूथ क्रमांक 121 पर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 291 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 264 वोट प्राप्त हुए। इस तरह कांग्रेस ने इस बूथ पर 27 वोटों की बढ़त दर्ज की।
राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ एक बूथ का नतीजा नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीतिक माहौल में बदलाव के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। डॉ. नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं। ऐसे में उनके बूथ पर भाजपा का पिछड़ना पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है।
प्रत्याशी बदलने के फैसले पर उठे सवाल
दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद प्रत्याशी बदलने के फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी सामने आई थी। इस दौरान विरोध प्रदर्शन हुए और हाईवे जाम करने की स्थिति भी बनी थी।
हालांकि, वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ताओं को समझाया और खुद भी आशुतोष तिवारी के समर्थन में चुनाव प्रचार किया। इसके बावजूद भाजपा को उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
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