महाराष्ट्र में SIR को लेकर बड़ा अपडेट, WhatsApp से भेजे वोटर डॉक्यूमेंट भी होंगे मान्य

HIGHLIGHTS
- महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर नया निर्देश जारी किया गया है।
- राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी एस. चोकालिंगम ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
- लोग ECIनेट सॉफ्टवेयर से मिले नोटिस का जवाब BLO को भेज सकेंगे।
महाराष्ट्र। राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर नया अपडेट सामने आया है। महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी एस. चोकालिंगम ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि SIR के दौरान व्हाट्सएप के जरिए भेजे गए वोटर दस्तावेजों को भी मान्य माना जाए। बुधवार को एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
अधिकारी के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को यह निर्देश भी दिया गया है कि आवश्यकता होने पर वे दस्तावेजों के सत्यापन के लिए लोगों के घर जा सकते हैं। ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर के जरिए जारी नोटिस का जवाब लोग अपने BLO को व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेज सकेंगे।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाया?
इससे पहले अधिकारियों ने बताया था कि एस. चोकालिंगम ने चुनाव आयोग से ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर में बदलाव करने का अनुरोध किया है। इसके तहत इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) को वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में खुद निर्णय लेने की सुविधा देने की बात कही गई थी।
हालांकि, कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ईसीआईनेट सिस्टम के जरिए मतदाता की पात्रता तय करने की ERO की कानूनी शक्तियों को कमजोर किया जा रहा है।
कब तक दाखिल कर सकते हैं दावे-आपत्तियां?
महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 12 अक्टूबर कर दी गई है।
वहीं, नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समय-सीमा 10 नवंबर तक रखी गई है। फाइनल पब्लिकेशन 16 नवंबर को किया जाएगा।
ज्ञानेश कुमार का देशभर में हो रहा विरोध
पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देशभर में आलोचना हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि इनमें से कुछ आदेश उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए।
विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार पर सत्ताधारी पक्ष के फायदे के लिए एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाया है। इन आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा है कि तीन सदस्यीय आयोग ने मतदाता सूची के SIR से जुड़े फैसलों सहित सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए हैं।
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