'गश्त के तय तरीकों से हटती है चीनी सेना': सीमा मुद्दे पर भारत की दो टूक

HIGHLIGHTS
- भारत और चीन एलएसी की समझ बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं।
- कांग्रेस अध्यक्ष ने मई 2020 से पहले भारत के गश्त अधिकार पूरी तरह बहाल होने पर सवाल उठाए।
- खरगे ने सीमा विवाद पर प्रधानमंत्री से संसद में बयान देने की मांग की।
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर भारत सरकार का रुख स्पष्ट किया। यह प्रतिक्रिया आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के कथित बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना (पीएलए) के साथ लगातार आमने-सामने की स्थिति का उल्लेख किया था।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि इस मामले की विस्तृत जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर तब बिगड़ती है, जब चीनी सेना गश्त के निर्धारित तरीकों का पालन नहीं करती है।
जायसवाल ने कहा कि दोनों देश लंबित मुद्दों को हल करने और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गलतफहमी तथा गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से बातचीत जारी रखे हुए हैं। दोनों पक्ष सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए उपयुक्त क्षेत्रों में एलएसी की समझ बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुए हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के आपसी संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
कांग्रेस ने पीएम मोदी से मांगा था जवाब
आईटीबीपी महानिदेशक के कथित बयान को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले में खुलकर जवाब देना चाहिए।
खरगे ने कई सवाल उठाते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश में पीएलए के साथ लगातार आमने-सामने की स्थिति की आईटीबीपी महानिदेशक की पुष्टि बेहद चिंताजनक है। उन्होंने पूछा कि क्या डोकलाम और गलवान के बाद एक और गंभीर टकराव हो रहा है।
उन्होंने कहा कि अगस्त में ताकसिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं। इसके बावजूद, वाचा-दामाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी टकराव जारी है। बताया जा रहा है कि यह जगह ताकसिंग से केवल 180 किलोमीटर दूर है।
खरगे ने सवाल किया कि क्या भारत की गश्त करने की पहुंच प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और पूछा कि देश को इस मामले में अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर संसद में बयान देने को कहा।
खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 बैठकें और बातचीत होने की खबरें हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भागीदारी के साथ विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर 25 दौर की बातचीत हो चुकी है। वहीं, कार्यकारी तंत्र और समन्वय परामर्श (डब्ल्यूएमसीसी) की 36 बैठकें हुई हैं। इसके अलावा, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और ब्रिक्स के लगातार शिखर सम्मेलन भी हुए हैं।
उन्होंने सवाल किया कि इन बैठकों और बातचीत से ठोस नतीजे क्या निकले हैं। खरगे ने यह भी पूछा कि क्या मई 2020 से पहले भारत को गश्त करने के जो अधिकार हासिल थे, वे पूरी तरह बहाल कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें अपने सशस्त्र बलों पर पूरा भरोसा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही जरूरी है, न कि कूटनीतिक तस्वीरें खिंचवाने और गले मिलने की कूटनीति। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विपक्ष पर हमला करने के बजाय संसद और देश को विश्वास में लेने की अपील की।
भारत-चीन के बीच विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत
इस साल 25 अगस्त को भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की बातचीत का 25वां दौर बीजिंग में हुआ था। दोनों देशों ने दोहराया था कि वे अपने-अपने नेताओं से मिले दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे।
दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ आपसी संबंधों के स्वस्थ और निरंतर विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की प्रतिबद्धता भी जताई थी।
जयशंकर की अजरबैजान यात्रा पर विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अजरबैजान यात्रा पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि विदेश मंत्री इस समय बाकू में हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान अजरबैजान के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। विदेश मंत्री की मौजूदा यात्रा उसी बैठक के बाद हो रही है।
जायसवाल के मुताबिक, विदेश मंत्री ने शुक्रवार को बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों के विभिन्न पहलुओं को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। जयशंकर ने राष्ट्रपति अलीयेव को भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की ओर से शुभकामनाएं भी दीं।
उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री ने अजरबैजान के अपने समकक्ष के साथ विस्तार से बातचीत की, जो उपयोगी रही। दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। वे राजनीतिक विचार-विमर्श बढ़ाने और एक-दूसरे के यहां प्रतिनिधिमंडल भेजने पर भी सहमत हुए। इन प्रतिनिधिमंडलों में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होंगे।
जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश, संपर्क व्यवस्था तथा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक समझ है, जो आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए अच्छा आधार प्रदान करती है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने अजरबैजान में भारतीय छात्रों की मेजबानी करने के लिए अपने समकक्ष को धन्यवाद दिया। उन्होंने कुछ महीने पहले ईरान से अजरबैजान के रास्ते भारतीय छात्रों को निकालने में सहयोग देने के लिए अजरबैजान सरकार का भी आभार जताया।
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