मथुरा जन्मभूमि विवाद: मध्यस्थता पर नहीं बनी सहमति, दोनों पक्ष अपने रुख पर कायम

HIGHLIGHTS
- श्रीकृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने समझौते की संभावना तलाशने की पहल की है।
- हिंदू पक्ष ने कहा कि वह कोर्ट में लड़कर अपना दावा हासिल करेगा।
- ईदगाह कमेटी ने 1968 के समझौते का हवाला देते हुए नई वार्ता में रुचि नहीं दिखाई।
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट की ओर से समझौते की संभावनाएं तलाशने की पहल के बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। हिंदू पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह समझौते के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के जरिए मामले का समाधान चाहता है, जबकि ईदगाह पक्ष भी वार्ता में शामिल होने को तैयार नहीं है।
दरअसल, इस विवाद से जुड़ी विशेष अनुमति याचिका (SLP) में दोनों पक्षों के बीच सुलह की संभावना तलाशने का आग्रह किया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को मामले में मध्यस्थता की कोशिश करने के निर्देश दिए थे।
लोक अदालत में नहीं पहुंचा ईदगाह पक्ष
इस मामले में 4 जुलाई को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सामने सुनवाई हुई थी, लेकिन शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। कमेटी के सचिव तनवीर अहमद ने लिखित रूप से कहा कि इस मामले को लोक अदालत में सूचीबद्ध नहीं किया जाए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने समझौता वार्ता के लिए 21, 22 और 23 अगस्त की तारीख तय की है।
हिंदू पक्ष ने रखी अपनी बात
हिंदू पक्ष की याचिकाकर्ता अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने कहा कि वह समझौता वार्ता में शामिल नहीं होंगी और अदालत में मुकदमा लड़कर अपना पक्ष रखेंगी।
वहीं, दूसरे याचिकाकर्ता अजय प्रताप सिंह ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय वार्ता में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समझौता नहीं बल्कि पूरी जमीन का दावा हासिल करना है।
याचिकाकर्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने भी कहा कि उनकी मांग पूरी जमीन को लेकर है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई औपचारिक पत्र मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय करेंगे।
ईदगाह कमेटी ने समझौते पर उठाए सवाल
शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के सचिव तनवीर अहमद का कहना है कि जन्मस्थान सेवा संघ और ईदगाह कमेटी के बीच वर्ष 1968 में समझौता हो चुका था और उसकी डिक्री भी पारित हो गई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे में अब नए सिरे से समझौते की आवश्यकता नहीं है और कमेटी इसे स्वीकार नहीं करती।
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