मायावती बोलीं- स्कूलों में यूनिफॉर्म, पर्दा और हिजाब के मामलों को आपसी समझ से सुलझाएं

HIGHLIGHTS
- मायावती ने महिलाओं की अस्मिता और आत्मसम्मान से जुड़े मामलों को संवेदनशील बताया
- स्कूलों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर और हिजाब के मुद्दे पर बयान दिया
- कोर्ट-कचहरी के बजाय स्कूल प्रबंधन और प्रशासन से समाधान की अपील
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि महिलाओं की अस्मिता, सम्मान और पर्दा आदि के माध्यम से आत्मसम्मान व स्वाभिमान की रक्षा से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर और हिजाब पहनने जैसे मामलों को ज्यादा तूल देकर अदालत में विवाद का विषय बनाने के बजाय स्कूल प्रबंधन और शासन-प्रशासन की आपसी समझ से सुलझाया जाना चाहिए। इससे किसी को भी इसकी आड़ में संकीर्ण राजनीति करने का अवसर नहीं मिलेगा।
बसपा सुप्रीमो ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि संविधान ने पूरे देश को एक सूत्र में जोड़कर मजबूत भारत बनाने की गारंटी दी है। इसके तहत सभी धर्मों के ग्रंथों, धार्मिक रीति-रिवाजों और मान्यताओं के आधार पर शांतिपूर्ण व सुखी जीवन जीने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसकी अनदेखी करने या इसमें दखल देने के बजाय सभी को इसकी पवित्रता का सम्मान करना चाहिए।
मायावती ने कहा कि बसपा सर्वसमाज के सम्मान और उनके जान-माल व मजहब की सुरक्षा की गारंटी वाली आंबेडकरवादी पार्टी है। पार्टी का मानना है कि किसी भी धर्म, धार्मिक ग्रंथ, धार्मिक प्रचलन और मान्यताओं से जुड़े संवेदनशील मामलों पर सभी लोगों को टीका-टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करना देश और जनहित में होगा।
बदायूं में शांतिपूर्ण समाधान निकाले प्रशासन
बसपा अध्यक्ष ने बदायूं की घटना का भी संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर जारी विवाद और तनाव की स्थिति का शासन-प्रशासन तत्काल शांतिपूर्ण और उचित समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि इस मामले में यही उचित होगा।
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