हिमाचल में भारी बारिश से हालात बिगड़े, 114 सड़कें बंद; कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट

HIGHLIGHTS
- शिमला में तेज बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी।
- भूस्खलन के चलते कुल्लू और मंडी में सबसे ज्यादा सड़कें प्रभावित हैं।
- राज्य में 250 जल आपूर्ति योजनाओं पर भी बारिश का असर पड़ा है।
हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश से परेशानियां लगातार बनी हुई हैं। प्रदेश की राजधानी शिमला में शुक्रवार शाम करीब 4 बजे तेज बारिश शुरू हुई। भारी बारिश के कारण शहर के कई नाले फिर उफान पर आ गए और कई स्थानों पर सड़कों पर जलभराव हो गया। स्कूल से छुट्टी के बाद घर लौट रहे विद्यार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। धर्मशाला और प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में भी बारिश दर्ज की गई।
भूस्खलन के कारण शुक्रवार शाम 6 बजे तक राज्य में 114 सड़कें बंद थीं। इसके अलावा 250 जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। सुबह के समय 140 सड़कें बंद थीं। कुल्लू और मंडी जिलों में सबसे ज्यादा सड़कें प्रभावित हुई हैं।
कहां कितनी बारिश हुई
बीते 24 घंटों के दौरान धर्मशाला में 91.1, धर्मशाला एडब्ल्यूएस में 60.0, नयना देवी में 44.6, जोगिंद्रनगर में 35.0, नालागढ़ में 34.0, ब्राह्मणी बिलासपुर में 27.6, बिलासपुर सदर में 25.8, पालमपुर में 21.6 और कसौली में 16.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार राज्य में 14, 17 और 18 अगस्त को ज्यादातर स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 15, 16, 19 और 20 अगस्त को कुछ स्थानों पर भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
आज ऊना, बिलासपुर, कांगड़ा और सिरमौर जिले के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं सोलन, शिमला, मंडी, हमीरपुर और चंबा के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
17 अगस्त को बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट है। 18 अगस्त को सिरमौर और कांगड़ा के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
अगले 4-5 दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। इसके बाद 3-4 दिनों में राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है।
मानसून सीजन में अब तक 181 लोगों की मौत
इस मानसून सीजन में 30 जून से 14 अगस्त तक प्रदेश में आपदा के कारण 181 लोगों की जान जा चुकी है। 283 लोग घायल हुए हैं। इस दौरान 31 पक्के और 51 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 302 कच्चे-पक्के मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
इसके अलावा 14 दुकानों और 258 गोशालाओं को भी नुकसान हुआ है। इस अवधि में 210 पालतू पशुओं की मौत हुई है। प्रदेश में इस मानसून के दौरान नुकसान का आंकड़ा 95,574.59 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
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