मुजफ्फरनगर: 5.5 लाख की हाईटेक हाइड्रोलिक कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र, डमरू बजाते दिखे भोलेनाथ

HIGHLIGHTS
- गुरुग्राम के बिचगड़ा गांव से 14 शिवभक्तों की टीम यह अनोखी कांवड़ लेकर निकली है।
- कांवड़ में फॉग मशीन और गंगाधारा के दृश्य ने इसे और खास बना दिया है।
- शिव चौक पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने कांवड़ के साथ फोटो और वीडियो बनाए।
मुजफ्फरनगर में सावन की कांवड़ यात्रा के दौरान इस बार आस्था के साथ आधुनिक तकनीक का भी अनोखा मेल देखने को मिल रहा है। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्तों के बीच हरियाणा के गुरुग्राम स्थित बिचगड़ा गांव से आई हाईटेक हाइड्रोलिक कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
इस अनोखी कांवड़ में भगवान शंकर की प्रतिमा हाइड्रोलिक तकनीक की मदद से ऊपर उठती और नीचे बैठती दिखाई दे रही है। साथ ही प्रतिमा अपने दोनों हाथों से डमरू बजाती नजर आती है। इसे देखने के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं और लोगों की भीड़ जुट रही है।
मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे यह आकर्षक कांवड़ मुजफ्फरनगर के प्रसिद्ध शिव चौक पहुंची। कांवड़ संघ के मुख्य सदस्य बिट्टू राणा ने बताया कि उनकी टीम 30 जुलाई को बिचगड़ा गांव से यात्रा के लिए रवाना हुई थी। इसके बाद 1 अगस्त की रात करीब 11 बजे हरिद्वार से पवित्र गंगाजल उठाया गया। अब सभी शिवभक्त अपने गांव स्थित बाबा भाननाथ आश्रम में जलाभिषेक के लिए वापस लौट रहे हैं।
बिट्टू राणा ने बताया कि इस कांवड़ की सबसे खास बात इसका हाइड्रोलिक सिस्टम है। इसमें स्थापित भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा हाइड्रोलिक तकनीक के जरिए अपने आप बैठती और खड़ी होती है। प्रतिमा के पीछे लगातार गंगाधारा का दृश्य भी दिखाई देता है। इसके अलावा इसमें फॉग मशीन भी लगाई गई है, जो खासकर रात के समय धुएं के प्रभाव के साथ कांवड़ को और आकर्षक बना देती है।
उन्होंने बताया कि इस हाईटेक कांवड़ को तैयार करने में करीब 5.5 लाख रुपये की लागत आई है। पूरी यात्रा में 14 शिवभक्तों की टीम साथ चल रही है, जो "बोल बम" के जयकारों के साथ अपनी यात्रा पूरी कर रही है।
मुजफ्फरनगर पहुंचने के बाद इस हाइड्रोलिक कांवड़ को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग जुट गए। कई लोगों ने इसके साथ फोटो और वीडियो भी बनाए। बिट्टू राणा ने कहा कि कांवड़ यात्रा उनके लिए केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।
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