मुजफ्फरनगर: बारिश में तालाब बनी रुड़की रोड, कांवड़ मार्ग की तैयारियों की खुली पोल

HIGHLIGHTS
- बारिश से मुजफ्फरनगर की रुड़की रोड पर भारी जलभराव हुआ।
- कांवड़ मार्ग की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल।
- PWD ने मौके पर पहुंचकर सुधार कार्य के निर्देश दिए।
मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर किए जा रहे दावों के बीच मंगलवार सुबह हुई बारिश ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। कुछ घंटों की तेज बारिश के बाद शहर के प्रमुख कांवड़ मार्गों में शामिल रुड़की रोड पर भारी जलभराव हो गया और सड़क तालाब में बदल गई।
रुड़की चुंगी से गुरु राम राय स्कूल तक करीब 500 मीटर का क्षेत्र डेढ़ से तीन फीट तक पानी में डूब गया। इससे वाहन चालकों, स्थानीय लोगों और राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कच्ची सड़क के बाद यह मार्ग हर साल लाखों शिवभक्त कांवड़ियों के शहर में प्रवेश का मुख्य रास्ता रहता है।
पहली तेज बारिश में ही सड़क पर हुए इस भारी जलभराव ने तैयारियों के दावों की स्थिति साफ कर दी। पिछले कई दिनों से जिला प्रशासन, नगर पालिका और PWD की ओर से निरीक्षण, सफाई अभियान और व्यवस्थाओं को बेहतर करने के दावे किए जा रहे थे, लेकिन मौके पर हालात अलग नजर आए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रुड़की रोड पर जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना है कि नालों की ऊंचाई सड़क से अधिक होने के कारण बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पाता और सड़क पर जलभराव हो जाता है। लोगों का आरोप है कि कांवड़ यात्रा से पहले हर साल निरीक्षण किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के युवा जिला अध्यक्ष ठाकुर गुलबहार राव ने कहा कि वह पिछले तीन वर्षों से लगातार इस समस्या को प्रशासन के सामने उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि कांवड़ यात्रा के दौरान इसी तरह बारिश होती है तो लाखों शिवभक्तों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद PWD की टीम अधिशासी अभियंता अनिल राणा के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। टीम ने रुड़की रोड से लेकर पुरकाजी स्थित उत्तराखंड बॉर्डर तक निरीक्षण किया। अधिकारियों को जलनिकासी व्यवस्था सुधारने और खराब सड़क को तत्काल ठीक कराने के निर्देश दिए गए।
अब सवाल उठ रहा है कि यदि यह निरीक्षण और कार्रवाई पहले हो जाती तो क्या कांवड़ मार्ग पर जलभराव की स्थिति बनती। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बाद ही विभाग सक्रिय होता है, जबकि जरूरत स्थायी समाधान की है।
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