मुजफ्फरनगर में रावण बने कांवड़िया ने खींचा सबका ध्यान, महिलाओं की सुरक्षा पर दिया बड़ा संदेश
By Hitesh — August 4, 2026

HIGHLIGHTS
- मूलचंद त्यागी ने 1 अगस्त को हरिद्वार से शुरू की थी अपनी कांवड़ यात्रा।
- उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि संदेश देना है।
- शिवभक्त ने कांवड़ यात्रा के दौरान हिंसा से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील की।
Author: — Dainik Dehat
मुजफ्फरनगर से होकर गुजर रही कांवड़ यात्रा में रोजाना अलग-अलग रूपों और अनोखी कांवड़ों के चलते शिवभक्त आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे शहर की सड़कों पर ऐसा ही एक अलग नजारा देखने को मिला, जब दिल्ली के समयपुर बादली निवासी शिवभक्त मूलचंद त्यागी रावण के पौराणिक स्वरूप में कांवड़ लेकर जाते नजर आए। उनका अनोखा रूप देखकर राहगीरों और अन्य शिवभक्तों की भीड़ जुट गई। लोगों ने उनके साथ फोटो खिंचवाई और सेल्फी लेने में भी रुचि दिखाई।
हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर निकले मूलचंद त्यागी ने बताया कि उन्होंने 1 अगस्त को अपनी कांवड़ यात्रा शुरू की थी। अब वह दिल्ली के समयपुर बादली स्थित शिव मंदिर में जलाभिषेक करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश देना है।
मूलचंद त्यागी ने बताया कि वह दिल्ली के निहाल विहार की रामलीला में कई वर्षों से रावण की भूमिका निभाते आ रहे हैं। इसी पहचान को उन्होंने इस बार कांवड़ यात्रा से जोड़ते हुए समाज के सामने एक संदेश देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि पौराणिक कथाओं में रावण का एक पहलू ऐसा भी बताया गया है, जिसमें वह अपनी बहन के सम्मान और स्वाभिमान के लिए खड़ा होता है। आज के समय में समाज को महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति इसी तरह जागरूक होने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बहन-बेटियों की सुरक्षा आज सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। समाज तभी मजबूत होगा, जब हर व्यक्ति महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाएगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान हाल के दिनों में मामूली दुर्घटनाओं या जल खंडित होने की घटनाओं के बाद कुछ स्थानों पर वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाओं पर भी मूलचंद त्यागी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति का मार्ग संयम, धैर्य और सेवा का है, इसमें हिंसा का कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी दुर्घटना में कांवड़ या गंगाजल खंडित हो जाए तो कानून अपने हाथ में लेने या किसी वाहन को नुकसान पहुंचाने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालना चाहिए।
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