नेहा बोरा का ऐलान, शांति बॉन्ड पर नहीं करेंगी हस्ताक्षर; हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

HIGHLIGHTS
- नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में एक सभा में शामिल होने के दौरान हिरासत में लिया गया था।
- उनके अनुसार, उन्हें आरके पुरम थाने में रातभर रखने के बाद सुबह छह बजे रिहा किया गया।
- एसईएम कोर्ट के नोटिस में शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का बॉन्ड और एक जमानतदार देने को कहा गया था।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने स्पष्ट किया है कि उनकी कोई शर्त नहीं है और वह शांति बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी। यह बयान दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद आया है।
नेहा बोरा ने अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 10 हजार रुपये का शांति बॉन्ड भरने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा है कि वह किसी भी बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी।
नेहा बोरा ने एसईएम कोर्ट की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उनसे 10,000 रुपये का बॉन्ड भरने और एक जमानतदार देने को कहा गया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका की खारिज
बीते शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया था। याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 130 के तहत शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने से संबंधित नोटिस को चुनौती दी गई थी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
यह था मामला
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में एक सभा में शामिल होने के दौरान हिरासत में लिया गया था। उनका आरोप है कि उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और आरके पुरम थाने में रातभर रखा गया। अगले दिन सुबह छह बजे उन्हें रिहा किया गया।
जारी नोटिस में मंडी हाउस पर नारेबाजी करने, निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शन करने और कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के लिए लोगों को उकसाने के आरोप लगाए गए हैं।
नेहा बोरा ने अपनी याचिका में कहा था कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका के समर्थन में कोई ठोस कारण, विशिष्ट घटना या समयावधि का उल्लेख नहीं किया गया है।
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