तेल की कीमतों में 28% उछाल, मध्य-पूर्व संकट से दुनिया में महंगाई बढ़ने की आशंका

मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध और ईरान के आसपास गहराते राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल ला दिया है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर को पार कर गई हैं। जब तेल की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ती हैं, तो दुनिया भर में महंगाई का नया दौर शुरू हो जाता है। माल और वस्तुओं की ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ जाते हैं, और इसका असर आम जनता की जेब पर सीधे पड़ता है।
होरमुज जलडमरूमध्य में अवरोध
होरमुज स्ट्रेट केवल एक संकरा समुद्री मार्ग नहीं है, बल्कि यह वैश्विक तेल आपूर्ति की धुरी है। दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है। ईरान के आसपास तनाव बढ़ने और युद्ध के खतरे के कारण यह महत्वपूर्ण जलमार्ग लगभग ठप हो गया है। बड़े टैंकर कंपनियां और जहाज मालिक सुरक्षा जोखिम के चलते इस क्षेत्र में अपने जहाज भेजने से हिचकिचा रहे हैं। जब परिवहन रुकता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति में कमी आ जाती है, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं।
1983 के बाद का सबसे बड़ा उछाल
बाजार के आंकड़े इस संकट की गंभीरता को दिखा रहे हैं। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडियेट (WTI) कच्चे तेल की कीमतों में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, ब्रेंट क्रूड में भी 26 प्रतिशत का उछाल देखा गया और यह लगभग 117 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वायदा बाजार के इतिहास में यह साल 1983 के बाद एक हफ्ते में दर्ज की गई सबसे बड़ी वृद्धि है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि होरमुज जलमार्ग जल्द बहाल नहीं होता, तो संकट और गहरा सकता है।
उत्पादन में भी भारी कमी
संकट केवल परिवहन तक सीमित नहीं है; तेल उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देश सुरक्षा और खतरे को देखते हुए उत्पादन कम कर रहे हैं।
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कुवैत: ईरान से सुरक्षा संबंधी खतरे के कारण कुवैत ने अपने तेल उत्पादन और रिफाइनरी गतिविधियों में कटौती कर दी है।
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इराक: दक्षिणी तेल क्षेत्रों का उत्पादन युद्ध से पहले 4.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन था, जो अब घटकर केवल 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है—लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट।
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE): समुद्र तटीय (ऑफशोर) उत्पादन को सावधानीपूर्वक प्रबंधित किया जा रहा है ताकि रिजर्व पर दबाव कम रहे।
इस तरह, मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य में अवरोध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता पैदा हो गई है।
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