एनएसई ला रहा 30,000 करोड़ का IPO, टूट सकता है हुंडई मोटर इंडिया का रिकॉर्ड

HIGHLIGHTS
- प्रस्तावित इश्यू में करीब 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री होगी
- IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS के रूप में पेश किया जाएगा
- NSE की कुल चुकता इक्विटी पूंजी का करीब 6% हिस्सा इश्यू में शामिल होगा
भारत के शेयर बाजार के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बनने की संभावना है। देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) अपना बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी में है। बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, करीब 30,000 करोड़ रुपये का यह आईपीओ 18 सितंबर को निवेश के लिए खुल सकता है। अगर यह समय-सारणी सही साबित होती है, तो यह 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ को पीछे छोड़कर भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा। भारतीय वित्तीय बाजार और निवेशकों के लिए यह इस साल की बड़ी हलचल में से एक है।
एनएसई के आईपीओ का संभावित शेड्यूल क्या है?
बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित आईपीओ की प्रमुख तारीखें इस प्रकार हो सकती हैं:
- प्राइस बैंड की घोषणा: एनएसई के आईपीओ के शेयरों का प्राइस बैंड 15 सितंबर को घोषित किए जाने की संभावना है।
- एंकर बुक खुलने की तारीख: बड़े और संस्थागत निवेशकों के लिए एंकर बुक 17 सितंबर को खुल सकती है।
- पब्लिक सब्सक्रिप्शन: आम निवेशकों के लिए आईपीओ 18, 21 और 22 सितंबर को खुला रह सकता है।
- लिस्टिंग: एनएसई के शेयरों की लिस्टिंग 25 सितंबर को होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की ओर से अभी इस प्रस्तावित इश्यू कैलेंडर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
आईपीओ का आकार और संरचना क्या होगी?
प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के रूप में लाया जा रहा है। इसके तहत 1 रुपये अंकित मूल्य वाले करीब 14.89 करोड़ यानी 148.9 मिलियन इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे। यह हिस्सेदारी एनएसई की कुल चुकता इक्विटी पूंजी का लगभग 6 प्रतिशत है।
पूरे इश्यू के ओएफएस होने का अर्थ है कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। एनएसई की ओर से कोई नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी रकम हिस्सेदारी बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी और एक्सचेंज को अपने परिचालन के लिए इससे कोई नया फंड नहीं मिलेगा।
भारतीय पूंजी बाजार और निवेशकों पर क्या असर होगा?
करीब 30,000 करोड़ रुपये के इस आईपीओ का भारतीय बाजार पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना है।
- बाजार में तरलता: इस बड़े इश्यू से बाजार में बड़ी मात्रा में तरलता आएगी। इससे दूसरे क्षेत्रों से पूंजी का प्रवाह एनएसई के आईपीओ की ओर बढ़ सकता है।
- मूल्यांकन का नया मानक: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग से वित्तीय सेवा क्षेत्र में मूल्यांकन के नए मानक बन सकते हैं।
- मौजूदा शेयरधारकों को अवसर: मौजूदा हितधारकों को अपनी हिस्सेदारी का मूल्य हासिल करने और बाहर निकलने का बड़ा अवसर मिलेगा।
एनएसई का आईपीओ क्यों है खास?
भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग को कॉर्पोरेट पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, एनएसई की ओर से इस आईपीओ की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन बाजार में इसे लेकर काफी उत्साह है।
अगर यह इश्यू करीब 30,000 करोड़ रुपये का रहता है, तो यह हुंडई मोटर इंडिया के मौजूदा रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा। इससे यह भी संकेत मिलेगा कि भारतीय प्राथमिक बाजार बड़े पैमाने के आईपीओ को संभालने के लिए तैयार है।
अब निवेशकों की नजर 15 सितंबर को संभावित प्राइस बैंड की घोषणा पर है। इसी के आधार पर इस बड़े आईपीओ का वास्तविक आकर्षण और मूल्यांकन तय होने की उम्मीद है।
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