कानपुर में भाजपा नेता रमेश यादव से लूटकांड की जांच में उलझी पुलिस, कर्मचारियों से पूछताछ पर अड़चन

HIGHLIGHTS
- पुलिस ने आठ से दस लोगों से पूछताछ करने की योजना बनाई थी।
- बुधवार को किसी भी संदिग्ध का बयान दर्ज नहीं हो सका।
- गुरुवार को रमेश यादव की मौजूदगी में कर्मचारियों और ग्रामीणों से पूछताछ की जाएगी।
कानपुर। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश सचिव रमेश यादव के फार्म हाउस में बंधक बनाकर लूटपाट किए जाने के मामले की जांच में पुलिस को कई अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस जिन कर्मचारियों को संदिग्ध मानकर पूछताछ करना चाहती है, उनके बयान दर्ज कराने से रमेश यादव ने इनकार कर दिया है। पुलिस का कहना है कि जांच में सहयोग नहीं मिलने पर घटना को भी संदिग्ध मानकर आगे की पड़ताल की जाएगी।
बुधवार को पुलिस अधिकारियों ने संदिग्धों से पूछताछ करने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन पांच संदिग्धों में से किसी का भी बयान नहीं लिया जा सका। अब गुरुवार को रमेश यादव की मौजूदगी में उनके कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी।
गौरतलब है कि सोमवार देर रात न्यूरी स्थित रमेश यादव के फार्म हाउस में दो नकाबपोश बदमाशों ने उन्हें बंधक बनाकर लूटपाट की थी। बदमाश करीब 34 लाख रुपये का माल लेकर फरार हो गए थे।
करोड़ों के फार्म हाउस में सुरक्षा के बावजूद बदमाशों का पता नहीं
रमेश यादव का फार्म हाउस करोड़ों रुपये की कीमत का है और वहां सुरक्षा के भी इंतजाम किए गए थे। इसके बावजूद बदमाश किस रास्ते से अंदर आए और किस ओर से फरार हुए, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है।
पुलिस ने इस मामले में आठ से दस संदिग्धों से पूछताछ करने की तैयारी की थी। इनमें रमेश यादव के ईंट-भट्ठे और फार्म हाउस पर काम करने वाले कर्मचारियों के साथ गांव के कुछ लोग भी शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, रमेश यादव के अपने रुख पर अड़े रहने के कारण बुधवार को की गई तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं।
पूरे दिन इंतजार करते रहे पुलिस अधिकारी, नहीं हो सकी पूछताछ
बुधवार को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी रमेश यादव के दरवाजे पर मौजूद रहे, लेकिन किसी भी संदिग्ध से पूछताछ नहीं हो सकी। इससे जांच आगे नहीं बढ़ पाई।
डीसीपी साउथ दीपेंद्रनाथ चौधरी ने बताया कि देर शाम रमेश यादव इस बात पर सहमत हुए कि कर्मचारियों और ग्रामीणों से थाने में पूछताछ करने के बजाय फार्म हाउस में उनकी मौजूदगी में सवाल किए जाएं। पुलिस ने फिलहाल इस व्यवस्था पर सहमति जताई है। गुरुवार को संदिग्धों से पूछताछ की जाएगी।
केयरटेकर प्रधान बने मुकदमे के वादी, तहरीर और बयान में अंतर
इस मामले में एक और सवाल प्राथमिकी दर्ज कराने वाले व्यक्ति को लेकर उठ रहा है। पुलिस के अनुसार, लूट की एफआईआर न्यूरी गांव के प्रधान राम नरेश यादव की तहरीर पर दर्ज की गई है।
राम नरेश यादव ने अपनी तहरीर में बताया कि सूचना मिलने पर जब वह फार्म हाउस पहुंचे, तो रमेश यादव के दोनों हाथ गमछे से बंधे हुए थे। उनके मुंह पर रुमाल और टेप लगा था।
वहीं, पुलिस कमिश्नर की पूछताछ के दौरान रमेश यादव ने बताया था कि उनके हाथ और मुंह पर टेप लगा हुआ था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि उनके मुंह पर पहले रुमाल और फिर टेप लगा था, तो उन्होंने राम नरेश यादव को फोन कैसे किया। पुलिस यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि पीड़ित होने के बावजूद रमेश यादव की जगह राम नरेश यादव को मुकदमे का वादी क्यों बनाया गया।
एकमात्र खराब कैमरे वाले स्थान से बदमाशों के घुसने की आशंका
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि बदमाश जिस एसी की जाली और बाउंड्री के सहारे फार्म हाउस में दाखिल हुए, वहां लगा एकमात्र कैमरा खराब था। इससे पुलिस को आशंका है कि बदमाश फार्म हाउस के बारे में अच्छी जानकारी रखते थे। उन्हें यह पता था कि कौन सा कैमरा काम नहीं कर रहा है और किस जगह से अंदर प्रवेश किया जा सकता है।
एक अन्य बिंदु भी पुलिस की जांच के दायरे में है। बताया जाता है कि रमेश यादव आमतौर पर फार्म हाउस में 20 से 25 हजार रुपये से अधिक नहीं रखते थे। लेकिन जिस दिन वहां 12 लाख रुपये रखे गए, उसी दिन लूट की घटना हो गई। इस बात ने भी पुलिस के सामने सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस का कहना है कि वारदात में किसी करीबी के शामिल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी लिया घटना का अपडेट
मामले के सत्ता से जुड़े होने के कारण लखनऊ से भी इसकी जानकारी ली जा रही है। सूत्रों के अनुसार, बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय ने डीजीपी से और डीजीपी कार्यालय ने पुलिस कमिश्नर से घटना की स्थिति के बारे में अपडेट लिया।
बताया जा रहा है कि पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने डीजीपी कार्यालय को जानकारी दी कि घटना हुई है और उसका खुलासा करने के लिए पुलिस की टीमें काम कर रही हैं।
पुलिस कमिश्नर बोले- जांच में बाधा नहीं डालनी चाहिए
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि जांच और पूछताछ पुलिस की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और किसी को भी इसमें बाधा नहीं डालनी चाहिए। घटना में जो भी व्यक्ति संदिग्ध नजर आएगा, उससे पूछताछ की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पूछताछ के बिना घटना का सही खुलासा करना आसान नहीं है। संदिग्धों से सवाल-जवाब के बाद ही जरूरी साक्ष्य जुटाए जा सकेंगे। ऐसे में पूछताछ की प्रक्रिया में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
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