नीट पेपर लीक आरोपों पर सियासत तेज, जंतर-मंतर पहुंचे केजरीवाल ने मांगा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा

HIGHLIGHTS
- नीट-यूजी 2026 में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक आरोपों को लेकर सियासत तेज, अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
- सोनम वांगचुक के अनशन को मिला केजरीवाल का समर्थन, जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर दिए निर्देश, अनशन के दौरान रोजाना मेडिकल निगरानी और जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराने को कहा गया।
नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर चल रहे युवाओं के विरोध प्रदर्शन और लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता व पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के अनशन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
केजरीवाल ने केंद्र को दी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने केंद्र सरकार से युवाओं की आवाज सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो इसका असर आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जरूरी है। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुझाव देते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय में बदलाव किया जाना चाहिए और सोनम वांगचुक जैसे शिक्षा सुधार से जुड़े व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
सोनम वांगचुक का अनशन जारी
नीट-यूजी 2026 में कथित अनियमितताओं को लेकर सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। गुरुवार को उनके अनशन का 19वां दिन था। वह परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही की मांग उठा रहे हैं।
लगातार अनशन के कारण वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई थी, जिसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई।
हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य निगरानी के दिए निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित चिकित्सकीय निगरानी की जाए।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन महत्वपूर्ण है और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि डॉक्टरों को किसी उपचार की आवश्यकता महसूस होती है तो तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
सरकार ने कोर्ट को दी जानकारी
सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वांगचुक के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम नियमित रूप से उनकी जांच कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मेडिकल टीम भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
सरकार के आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य निगरानी से जुड़ी जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।
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