संसद में हंगामे के बीच लोकसभा से पास हुआ जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026

HIGHLIGHTS
- नए नियमों के तहत दो साल से ज्यादा देरी से जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी।
- सरकार ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाना है।
- लोकसभा में मंजूरी के बाद अब विधेयक को कानून बनने के लिए राज्यसभा की मंजूरी का इंतजार है।
संसद के मानसून सत्र के 10वें दिन विपक्ष ने दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया। विपक्ष 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा की मांग करता रहा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगता रहा। हंगामे के बीच लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया।
दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भाजपा सांसद दिलीप सैकिया की अध्यक्षता में विधेयक को चर्चा और मंजूरी के लिए पेश किया गया। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इस दौरान कई विपक्षी सांसद सदन के बीचों-बीच पहुंच गए और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग करने लगे।
रिजिजू ने विपक्ष पर जताई नाराजगी
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पर चर्चा में हिस्सा नहीं लेने को लेकर विपक्ष पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा चाहती थी।
रिजिजू ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है और भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सांसदों को चुनकर संसद भेजा है, वे उनसे जवाब मांगेंगे। उन्होंने विपक्षी सांसदों से अपील की कि वे भविष्य में विधेयकों पर चर्चा में भाग लें और सदन की कार्यवाही बाधित न करें।
भाजपा सांसद दिलीप सैकिया ने भी कहा कि विपक्ष के सहयोग के बिना विधेयक पारित होना दुर्भाग्यपूर्ण है। विधेयक पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
विधेयक में क्या बदलाव किए गए हैं?
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के कुछ प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं।
इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं की समय पर जानकारी दर्ज कराने को बढ़ावा देना है। इसमें देरी से जन्म और मृत्यु पंजीकरण कराने के नियमों को सख्त किया गया है।
अब घटना के दो साल से अधिक समय बाद पंजीकरण कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होगी। मौजूदा कानून में एक साल से अधिक देरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होती थी।
नए प्रावधान के अनुसार, दो साल तक की देरी के लिए मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।
विधेयक में और क्या बदलाव हैं?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20 जुलाई को इस विधेयक को पेश करने की मंजूरी दी थी। इसमें 2023 में मूल कानून में किए गए बदलावों के बाद देरी से पंजीकरण की प्रक्रिया में और सुधार का प्रस्ताव रखा गया है।
विधेयक में कानूनी परिभाषाओं में भी बदलाव किया गया है। इसमें 'कार्यकारी मजिस्ट्रेट' शब्द को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अनुसार बदला गया है। पहले इसमें 1973 की आपराधिक प्रक्रिया संहिता का संदर्भ दिया जाता था।
अब राज्यसभा की मंजूरी का इंतजार
लोकसभा से विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राज्यसभा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार ने मानसून सत्र में हंगामे के बीच अब तक दो अन्य विधेयक भी पारित कराए हैं।
लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद के दोनों सदनों से मंजूर हो चुके हैं।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को अब राज्यसभा की मंजूरी मिलना बाकी है।
सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति को रिपोर्ट पेश करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया। यह समिति संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 की जांच कर रही है। अब समिति अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के आखिरी सप्ताह के पहले दिन तक पेश कर सकती है।
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