11 साल बाद भी नहीं बनी पिनाऊं गांव की सड़क, गर्भवती को छह किमी डंडी से पहुंचाया अस्पताल

HIGHLIGHTS
- गांव के लिए सड़क निर्माण को 2015 में मंजूरी मिली थी।
- स्वीकृति के बावजूद 11 साल में सड़क का निर्माण नहीं हो सका।
- गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने डंडी के सहारे पाटिंगधार पहुंचाया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मेजर देव सिंह दानू और पूर्व विधायक शेर सिंह दानू के गांव पिनाऊं तक आज भी सड़क नहीं पहुंच पाई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणा के बावजूद गांव सड़क सुविधा से नहीं जुड़ सका। सड़क नहीं होने का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। पूर्व विधायक स्वर्गीय शेर सिंह दानू के नाम पर वर्ष 2015 में 23 किलोमीटर लंबी धुराधारकोट-वांक-पिनाऊं सड़क स्वीकृत की गई थी। लेकिन स्वीकृति के 11 साल बाद भी सड़क का निर्माण नहीं हो पाया।
बुधवार को पिनाऊं गांव की आंगनबाड़ी कार्यकत्री खिमुली देवी को अचानक प्रसव पीड़ा होने पर ग्रामीणों ने डंडी के सहारे छह किलोमीटर पैदल चलकर बलाण गांव के कालीताल तक पहुंचाया। पिनाऊं से बलाण गांव तक जाने वाला पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीणों ने रास्ते की मरम्मत की और गर्भवती महिला को पाटिंगधार तक पहुंचाया।
ग्राम प्रधान लखपत दानू ने बताया कि बुधवार सुबह 11 बजे गर्भवती महिला को डंडी के जरिए छह किलोमीटर दूर पाटिंगधार लाया गया। यहां शाम साढ़े पांच बजे तक हैली का इंतजार किया गया। हैली के नहीं पहुंचने के बाद शाम छह बजे कालीताल सड़क मार्ग तक पहुंचे। इसके बाद रात साढ़े नौ बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टर मौजूद नहीं थे। इसके बाद एंबुलेंस से उन्हें जिला अस्पताल बागेश्वर ले जाया गया।
आए दिन डंडी से अस्पताल ले जाने की मजबूरी
पिनाऊं गांव की आशा बिमला देवी, लखपत सिंह, हिम्मत सिंह, लक्ष्मण सिंह, हरूली देवी, कस्तूरा देवी, नंदी देवी, सुरेंद्र सिंह और मोतिमा देवी समेत अन्य ग्रामीणों ने गर्भवती महिला को छह किलोमीटर तक डंडी के सहारे खतरनाक रास्ते से सड़क तक पहुंचाया।
ग्राम प्रधान लखपत दानू ने कहा कि दो-दो मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी सड़क का निर्माण नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को आए दिन डंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
पिनाऊं गांव के लिए जो सड़क स्वीकृत की गई है, उसके रास्ते में काफी संख्या में बाज और बुरांश के पेड़ हैं। इसमें वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। धुराधारकोट-वांक-पिनाऊं के नाम से सड़क को स्वीकृति मिली है। हालांकि, लोहाजंग से वांक गांव तक सड़क बन चुकी है। अगर ग्रामीणों की सहमति होती है तो वांक गांव से भी पिनाऊं तक सड़क बनाई जा सकती है।
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