मोबाइल फोन उद्योग से सरकार को मिला 3.25 लाख करोड़ का टैक्स, अश्विनी वैष्णव ने बताए आंकड़े

HIGHLIGHTS
- पीएलआई योजना के तहत सरकार ने 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया।
- मोबाइल उद्योग से 25,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर और 3 लाख करोड़ रुपये जीएसटी प्राप्त हुआ।
- वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन बढ़कर 11.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि सरकार ने मोबाइल फोन उद्योग से कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये का कर संग्रह किया है। यह रकम मोबाइल उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत दिए गए 19,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन से काफी ज्यादा है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की कोशिशों पर सवाल उठाने वाली मीडिया रिपोर्टों की आलोचना का जवाब दिया।
वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर आंकड़े साझा करते हुए बताया कि योजना के तहत सरकार ने 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया। इसके बदले लाभार्थियों से 25,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर और 3 लाख करोड़ रुपये वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में प्राप्त हुए।
मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में 25 लाख लोग काम कर रहे हैं। इनमें से 12 लाख लोगों को अकेले मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार मिला है। उनका यह बयान एक मीडिया राय वीडियो के जवाब में आया, जिसमें सब्सिडी के माध्यम से भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के प्रयासों की कमियां बताई गई थीं।
क्या भारत को मोबाइल निर्यात से फायदा हो रहा है?
सरकार की ओर से मार्च में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने वित्त वर्ष 2025 में 2 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का निर्यात किया। देश में मोबाइल फोन का आयात लगभग नगण्य स्तर पर पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में आयात घरेलू मांग का करीब 0.02 प्रतिशत रह गया, जबकि 10 साल पहले यह आंकड़ा 75 प्रतिशत था।
ये आंकड़े देश में मोबाइल फोन के उत्पादन और निर्यात में हुई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी हुई?
वित्त वर्ष 2014-15 में इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में छह गुना बढ़कर लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इसी अवधि में मोबाइल फोन का उत्पादन करीब 0.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात भी पिछले 10 वर्षों में आठ गुना बढ़ा है। 2014-15 में यह लगभग 0.38 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। ये आंकड़े देश के विनिर्माण क्षेत्र में हुई मजबूत वृद्धि को दर्शाते हैं।
सरकार की अगली योजना क्या है?
सरकार ने अब मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) शुरू की है। इसके तहत उपकरणों के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कुल 62,500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य ऐसे भारतीय स्मार्टफोन विकसित करना है, जिन्हें देश में ही डिजाइन और निर्मित किया जाएगा। अश्विनी वैष्णव ने भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अक्तूबर 2028 की समय-सीमा तय की है।































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