TMC के कांग्रेस में विलय की अटकलों पर विराम, वेणुगोपाल बोले- इसमें कोई सच्चाई नहीं

कांग्रेस ने गुरुवार को उन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कांग्रेस में विलय की बात कही जा रही थी। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट कहा कि यह पूरी तरह से निराधार और अफवाहों पर आधारित चर्चा है।
वेणुगोपाल ने कहा कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने बताया कि इससे पहले कांग्रेस के संचार विभाग की ओर से भी इस मुद्दे पर स्थिति साफ की जा चुकी है। उनके अनुसार, हाल ही में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और टीएमसी नेतृत्व के बीच हुई मुलाकातें केवल शिष्टाचार और सामान्य राजनीतिक चर्चा का हिस्सा थीं।
उन्होंने आगे कहा कि ये बैठकें इंडिया गठबंधन को मजबूत करने और साझा मुद्दों पर संवाद बढ़ाने के उद्देश्य से हुई थीं। वेणुगोपाल के मुताबिक, विपक्षी दल लोकतांत्रिक मूल्यों और सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहते हैं, और यही बातचीत का मुख्य उद्देश्य था।
टीएमसी और कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर अटकलों को तब और बल मिला जब मंगलवार को ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से मुलाकात की, और अगले ही दिन अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में राहुल गांधी से अलग से बैठक की। इन लगातार बैठकों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था।
हालांकि टीएमसी के भीतर भी इस तरह की किसी संभावना से इनकार किया गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी साफ कहा है कि टीएमसी और कांग्रेस के बीच विलय की कोई बात नहीं चल रही है।
कांग्रेस ने इसी दौरान अगले तीन महीनों के लिए देशव्यापी जन आंदोलन की भी घोषणा की है। इस अभियान के तहत पार्टी महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा में कथित अनियमितताओं, सामाजिक असमानता और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।
वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता और नेता इस अभियान में सक्रिय रूप से सड़क पर उतरेगा और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाएगा।
मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द होने पर भी कांग्रेस ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। वेणुगोपाल ने कहा कि नामांकन केवल इसलिए खारिज हुआ क्योंकि आवश्यक जानकारी का खुलासा नहीं किया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके खिलाफ न तो कोई आपराधिक मामला है, न एफआईआर, न चार्जशीट और न ही कोई आरोप तय हुआ है।
कांग्रेस का कहना है कि एक तकनीकी आधार पर नामांकन रद्द किया गया, जबकि इसके पीछे कोई आपराधिक कारण नहीं है।
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