यूपी में कांवड़ यात्रा की ड्रोन से होगी निगरानी, डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

HIGHLIGHTS
- डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी संबंधित जिलों को सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
- संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात होगा और यात्रा को 'नो इंसीडेंट, नो एक्सीडेंट' लक्ष्य के साथ संपन्न कराया जाएगा।
- कांवड़ मार्गों, शिविरों और घाटों पर बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था और ट्रैफिक मैनेजमेंट को मजबूत किया जाएगा।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इस वर्ष होने वाली कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। यात्रा मार्गों की निगरानी पहली बार ड्रोन कैमरों के जरिए की जाएगी। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के आदेश दिए हैं।
मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक में डीजीपी ने कहा कि कांवड़ यात्रा को 'नो इंसीडेंट, नो एक्सीडेंट' के लक्ष्य के साथ संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह दुरुस्त कर लिए जाएं।
ड्रोन से होगी निगरानी, सुरक्षा पर रहेगा खास फोकस
डीजीपी ने निर्देश दिए कि कांवड़ मार्ग, शिविर, प्रमुख घाट और भीड़भाड़ वाले स्थलों पर ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जाए। इसके साथ ही बैरिकेडिंग, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुचारु यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने को कहा गया है। 28-29 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को देखते हुए सभी जिलों को समय रहते तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
लंबित मामलों के जल्द निस्तारण के निर्देश
अपराध समीक्षा बैठक में डीजीपी ने हत्या, डकैती, लूट, चेन स्नैचिंग और अन्य गंभीर मामलों की लंबित विवेचनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सक्रिय अपराधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट के तहत प्रभावी कार्रवाई करने पर भी जोर दिया।
राजीव कृष्ण ने कहा कि 'बीट सूचना यक्ष ऐप की आत्मा है', इसलिए बीट स्तर पर सूचना संग्रह और उसका समय पर अपडेट होना बेहद जरूरी है।
थानों में खड़े वाहनों के निस्तारण पर भी जोर
बैठक में थानों में लंबे समय से खड़े जब्त वाहनों के निस्तारण की समीक्षा भी की गई। डीजीपी ने अलीगढ़ और रायबरेली में विकसित डंपिंग यार्ड मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा विवेचनाओं की नियमित निगरानी के लिए औरैया पुलिस द्वारा विकसित 'केस डायरी मॉनिटरिंग डैशबोर्ड पोर्टल' का उपयोग करने को कहा गया, ताकि 60 और 90 दिनों के भीतर पूरी होने वाली जांचों की प्रभावी समीक्षा की जा सके।
मिशन शक्ति और सड़क सुरक्षा अभियान के सकारात्मक परिणाम
डीजीपी ने बताया कि मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के बाद किए गए विश्लेषण में दहेज हत्या के मामलों में करीब 43 प्रतिशत और दहेज प्रताड़ना के मामलों में लगभग 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
उन्होंने सड़क सुरक्षा से जुड़े जेडएफडी (ZFD) और आरटीसी (RTC) अभियान की भी समीक्षा की। आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 30 जून 2026 के बीच सड़क दुर्घटनाओं में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 9 से 10 प्रतिशत की कमी आई है। डीजीपी ने अधिकारियों को इन अभियानों को और प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।
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