फरीदाबाद के रमन की अनोखी श्रद्धा, प्रेमानंद महाराज के लिए कर रहे दंडवत कांवड़ यात्रा

HIGHLIGHTS
- रमन ने 22 जुलाई को हरिद्वार से अपनी यात्रा की शुरुआत की थी।
- यात्रा में उनके साथ दो भाई और तीन दोस्त सहयोग कर रहे हैं।
- इससे पहले वह 12 बार सामान्य कांवड़ यात्रा कर चुके हैं।
फरीदाबाद के सरूरपुर गांव के 28 वर्षीय रमन ने आस्था और श्रद्धा की मिसाल पेश की है। रमन हरिद्वार से दंडवत कांवड़ यात्रा करते हुए वृंदावन की ओर जा रहे हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करना है। वह अपने साथ चार लीटर गंगाजल लेकर चल रहे हैं और वृंदावन पहुंचकर इसी गंगाजल से प्रेमानंद महाराज का अभिषेक करने की इच्छा रखते हैं।
पांच साल जॉर्डन में की नौकरी
रमन ने बताया कि वह करीब पांच वर्षों तक जॉर्डन की एक एक्सपोर्ट कंपनी में कोऑर्डिनेटर के पद पर काम कर चुके हैं। वहां उन्हें लगभग 45 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलता था। करीब तीन साल पहले उन्होंने प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुनने शुरू किए, जिसके बाद उनका आध्यात्मिक जुड़ाव बढ़ता गया।
जब उन्हें महाराज के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी मिली तो उन्होंने नौकरी छोड़कर भारत लौटने और उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए दंडवत कांवड़ यात्रा करने का संकल्प लिया।
22 जुलाई से हरिद्वार से शुरू हुई यात्रा
रमन ने अपनी यात्रा 22 जुलाई को हरिद्वार से शुरू की थी। इस पूरी यात्रा में उनके दो भाई और तीन दोस्त लगातार साथ चल रहे हैं। वे रमन की सुरक्षा, भोजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का ध्यान रख रहे हैं, ताकि यात्रा बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके।
12 बार कर चुके हैं सामान्य कांवड़ यात्रा
रमन ने बताया कि वह इससे पहले 12 बार सामान्य कांवड़ यात्रा कर चुके हैं, लेकिन दंडवत कांवड़ यात्रा वह पहली बार कर रहे हैं। उनके अनुसार यह यात्रा सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि उनकी अटूट श्रद्धा और गुरु के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
यूपी में मिली सुविधा, फरीदाबाद में ट्रैफिक बना परेशानी
यात्रा के अनुभव के बारे में रमन ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासन की ओर से अच्छी व्यवस्था मिली, जिससे यात्रा आसान रही। हालांकि फरीदाबाद में भारी ट्रैफिक के कारण उन्हें आगे बढ़ने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
इसके बावजूद रमन का उत्साह और विश्वास कायम है। उनका कहना है कि उन्हें भरोसा है कि उनकी यह तपस्या सफल होगी और वह जल्द ही वृंदावन पहुंचकर अपने संकल्प को पूरा करेंगे।
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