कांवड़ यात्रा के लिए यूपी पुलिस तैयार, एडीजी ने बताया सुरक्षा का पूरा प्लान; 5500 दरोगा संभालेंगे सुरक्षा व्यवस्था

HIGHLIGHTS
- कांवड़ यात्रा की सुरक्षा के लिए प्रदेशभर में 60 हजार से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 5,500 सब-इंस्पेक्टर तैनात किए जाएंगे।
- श्रद्धालुओं को पारंपरिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह, एक्सप्रेसवे पर कांवड़ियों के प्रवेश पर रोक लगाई गई।
- कांवड़ की ऊंचाई, साउंड सिस्टम और भड़काऊ सामग्री को लेकर नियम तय, सोशल मीडिया पर भी रखी जाएगी नजर।
कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए पुलिस और प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि इस बार यात्रियों और आम लोगों को परेशानी से बचाने के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देना और सामान्य जनजीवन को प्रभावित होने से रोकना है।
प्रदेशभर में कांवड़ यात्रा की सुरक्षा के लिए 60 हजार से अधिक आरक्षियों और करीब साढ़े 5 हजार सब-इंस्पेक्टरों की तैनाती की जा रही है। सभी पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही एटीएस भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखेगी।
श्रद्धालु पारंपरिक मार्गों का ही करें इस्तेमाल
एडीजी भानु भास्कर ने कांवड़ यात्रियों से अपील की है कि वे केवल पारंपरिक मार्गों का ही इस्तेमाल करें। उन्होंने नए बने एक्सप्रेसवे जैसे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक एक्सप्रेसवे और मेरठ-लखनऊ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे पर कांवड़ियों के प्रवेश पर रोक लगाई है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहले से व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें प्रकाश व्यवस्था, झाड़ियों की सफाई, सड़क मरम्मत, चिकित्सा सुविधाएं और एम्बुलेंस की व्यवस्था शामिल है।
मंदिरों और जलाशयों पर रहेगी कड़ी सुरक्षा
कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा को देखते हुए शिवालयों पर तीन से सात स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। मंदिरों के गर्भगृह, बाहर के हिस्सों और सीढ़ियों पर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
यात्रा मार्गों पर भी तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। वहीं जलाशयों पर बैरिकेडिंग, प्रशिक्षित नाविक, फ्लड कंपनियों के पीएसी जवान, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहेंगी। इसके अलावा पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अलग से पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है। मंदिरों, यात्रा मार्गों और जलाशयों पर उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके अलावा एटीएस और अन्य प्रशिक्षित सुरक्षा दल पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ नोएडा और गाजियाबाद में भी सतर्क रहेंगे।
कांवड़ की ऊंचाई और साउंड सिस्टम को लेकर नियम तय
प्रशासन ने कांवड़ संरचनाओं को लेकर भी नियम निर्धारित किए हैं। जमीन से कांवड़ की ऊंचाई 10 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए और इसकी चौड़ाई 10 से 12 फीट के बीच रखनी होगी।
साउंड सिस्टम की सीमा 75 डेसिबल तय की गई है। पुलिसकर्मी साउंड मैपिंग उपकरणों के जरिए इसकी निगरानी करेंगे और सीमा पार होने पर चेतावनी व जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा भड़काऊ सामग्री, जाति या संप्रदाय से जुड़ी सामग्री और अश्लील गानों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। आयोजकों से भजन और आध्यात्मिक गीतों को प्राथमिकता देने की अपील की गई है।
कांवड़ यात्रा मार्ग पर ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर भी रोक रहेगी, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों। साथ ही यात्रा के दौरान हथियार लेकर चलने की अनुमति नहीं होगी।
होटल और दुकानों की जांच, सोशल मीडिया पर भी नजर
फूड एंड सेफ्टी विभाग होटल और खान-पान की गुणवत्ता के साथ रेट लिस्ट की जांच करेगा। पुलिस इस प्रक्रिया में सीधे शामिल नहीं होगी। दुकानदारों को अपनी दुकानों के बाहर रेट लिस्ट लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
अफवाहों को रोकने के लिए डिजिटल वॉलंटियर्स और आधुनिक सॉफ्टवेयर के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निगरानी की जा रही है, ताकि गलत सूचना फैलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
एडीजी भानु भास्कर ने कहा कि इस बार सरकार और पुलिस का लक्ष्य कांवड़ यात्रा को जीरो इंसिडेंट और जीरो एक्सीडेंट के सिद्धांत पर सफलतापूर्वक संपन्न कराना है। इसके लिए सभी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं और श्रद्धालुओं व आम नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है।
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