धराली आपदा के एक साल बाद भी नहीं भरे जख्म, मलबे के बीच जिंदगी फिर तलाश रही रास्ता

HIGHLIGHTS
- खीरगंगा नदी में आई बाढ़ ने धराली कस्बे को भारी नुकसान पहुंचाया था।
- 52 लापता लोगों में से अब तक 20 को मृत घोषित किया गया, 19 परिवारों को राहत राशि मिली।
- कई प्रभावित परिवार अब भी पुनर्वास और आर्थिक सहायता का इंतजार कर रहे हैं।
उत्तरकाशी। तारीख पांच अगस्त, साल 2025। यह वह दिन था जब उत्तरकाशी जिले में खीरगंगा नदी में अचानक आए सैलाब ने गंगोत्री हाईवे के किनारे बसे धराली कस्बे को मलबे में बदल दिया था।
इस विनाशकारी बाढ़ की तस्वीरों और वीडियो ने देश-दुनिया को झकझोर दिया था। आपदा में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 52 लोग लापता हुए थे। इनमें से अब तक 20 लोगों को मृत घोषित किया जा चुका है।
आपदा के बाद उजड़े घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के अवशेष आज भी धराली में नजर आते हैं। कभी गंगोत्री धाम की यात्रा का प्रमुख पड़ाव रहा यह कस्बा अब आपदा के जख्मों को समेटे खामोश दिखाई देता है।
धराली के पहले जैसी स्थिति में लौटने की उम्मीद अब कम नजर आती है। हालांकि मलबे के बीच से रास्ते निकाले गए हैं और उजड़े हुए बाग फिर से संवरने लगे हैं। स्थानीय लोगों की हिम्मत, जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश और सरकार की ओर से किए जा रहे पुनर्निर्माण कार्यों के चलते धराली फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहा है।
पसरी है मलबे की चादर
श्रीकंठ पर्वत से निकलने वाली खीरगंगा नदी में बाढ़ आने का इतिहास पुराना रहा है, लेकिन नदी में इतनी विनाशकारी बाढ़ आएगी कि धराली कस्बे का स्वरूप ही बदल जाएगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
गंगोत्री धाम यात्रा का यह पड़ाव सर्दियों में बर्फबारी के दौरान भी लोगों से गुलजार रहता था। लेकिन आज यह क्षेत्र आपदा के निशान और मलबे की चादर में ढका हुआ नजर आता है।
चारधाम यात्रा के दौरान भी यहां पहले जैसी चहल-पहल दिखाई नहीं दी। हालांकि शासन और प्रशासन की ओर से आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और आजीविका बढ़ाने के लिए कुछ प्रयास किए गए हैं, लेकिन प्रभावितों के अनुसार अभी तक किए गए प्रयास पर्याप्त नहीं हैं।
धरातल पर धराली की स्थिति में भी कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आया है।
आपदा के एक साल बाद भी धराली की खामोशी और वहां के जख्मों की गहराई महसूस की जा सकती है। यहां जिंदगी की रफ्तार जैसे थम गई है और लोग अपने खोए हुए सपनों को फिर से संवारने की कोशिश में जुटे हैं।
आपदा के कारण बदली परिस्थितियों के बीच स्थानीय लोगों की उम्मीदें भले ही कम हो गई हैं, लेकिन वे अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने में लगे हुए हैं।
तीन दिन पहले धराली पहुंचे लोगों ने देखा कि आपदा में टूटे कुछ आवासीय और व्यावसायिक भवनों का निर्माण फिर से शुरू हो चुका है। इससे यह साफ नजर आता है कि आपदा ने लोगों के घरों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन उनका हौसला नहीं तोड़ सकी।
19 मृतकों के आश्रितों को पांच लाख रुपये राहत
आपदा में लापता हुए 52 लोगों में से अब तक 20 लोगों को मृत घोषित किया गया है। इनमें से 19 मृतकों के आश्रितों को प्रति परिवार पांच लाख रुपये की राहत राशि दी गई है।
एक अन्य मृतक के आश्रित को राहत राशि देने की प्रक्रिया जारी है। वहीं, बाकी 32 लोगों को मृत घोषित करने को लेकर उनके राज्यों के साथ समन्वय की कार्रवाई चल रही है।
डीएनए सैंपलिंग से चार मृतकों की हुई पहचान
आपदा के बाद मिले चार शवों की पहचान डीएनए सैंपलिंग के माध्यम से की गई। इनमें धराली का एक स्थानीय युवक और तीन सेना के जवान शामिल थे।
इनके आश्रितों को एसडीआरएफ मद से चार लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से एक लाख रुपये सहित कुल पांच लाख रुपये की राहत राशि दी गई।
29 भवन मालिकों को अब भी सहायता का इंतजार
हर्षिल और धराली में कुल 116 व्यावसायिक होटल और दुकानें आपदा की चपेट में आए थे। इनमें से 86 होटल मालिकों को पांच से 10 लाख रुपये के बीच कुल 6.93 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया।
मुआवजा वितरण के दौरान सामने आया कि 29 होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सरकारी भूमि पर बने हुए थे। इस वजह से उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया। हालांकि उन्हें अन्य सरकारी योजनाओं से लाभ दिलाने का आश्वासन दिया गया है।
सरकारी सहायता से अपनी जमीन पर बना रहे घर
आपदा के बाद प्रभावितों के पुनर्वास की बात कही गई थी, लेकिन फिलहाल यह पुनर्वास प्रभावितों की अपनी जमीन पर सरकारी सहायता से भवन निर्माण तक सीमित रह गया है।
115 प्रभावितों में से 21 लोगों की भूमि का चिह्नीकरण किया गया है। इन्हें प्रति परिवार 4.88 लाख रुपये की दर से पहली किस्त के रूप में 2.32 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
66 प्रभावितों के भू-सर्वेक्षण के बाद पहली किस्त जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, 28 प्रभावितों में से 15 की भूमि के भू-सर्वेक्षण का काम जारी है, जबकि बाकी 13 के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया चल रही है।
आजीविका संवर्धन के नाम पर मिली तीन लाख रुपये की सहायता
धराली के 99 आपदा प्रभावितों को रीप परियोजना के तहत आजीविका संवर्धन के लिए प्रति परिवार तीन लाख रुपये की सहायता दी गई है।
हालांकि इस सहायता को लेकर भी प्रभावितों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि कई प्रभावित परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है।
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