बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को आरा दौरे पर रहे। वे कई कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए यहां आए थे। लेकिन, सीएम दौरे को लेकर जनप्रतिनिधियों से लेकर आम जनता ने उनके प्रति नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मुख्यमंत्री के अंगरक्षकों पर धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, आरा सांसद को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दल के नेता या कार्यकर्ता कैमरे के सामने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
आरा दौरे पर आए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सबसे पहले जीरो माइल स्थित नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया। इसके बाद वे बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर गांव में पंचायत राज्य भवन का उद्घाटन करने पहुंचे। यहां मौजूद सांसद, विधायक, एमएलसी और अन्य जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री से मुलाकात करने और उनका स्वागत करने के लिए उपस्थित थे, लेकिन अंगरक्षकों ने उन्हें सीएम से न तो मुलाकात करने दी और न ही तस्वीर खिंचवाने दी।
बताया गया कि जैसे ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे उनके आसपास दर्जनों कमांडो ने घेरा डाल लिया। स्वागत के लिए सांसद, विधायक, एमएलसी, पूर्व विधायक और जेडीयू के कई नेता गुलदस्ता, अंगवस्त्र और माला लेकर खड़े थे, लेकिन सीएम नीतीश कुमार ने किसी से भी मुलाकात नहीं की। बल्कि, उनके अंगरक्षकों ने जनप्रतिनिधियों को धक्का देकर बार-बार साइड करने का प्रयास किया।
मंत्री ने मना किया, लेकिन नहीं माने
स्वागत के लिए आरा के सांसद सुदामा प्रसाद, बड़हरा के विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह, एमएलसी राधा चरण साह और जेडीयू व एनडीए के अन्य नेता मौजूद थे। लेकिन, जैसे ही मुख्यमंत्री पहुंचे उनके अंगरक्षकों ने जनप्रतिनिधियों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। इस दौरान पत्रकारों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने जब अंगरक्षकों के दुर्व्यवहार को देखा तो उन्हें ऐसा करने से रोका, लेकिन धक्का-मुक्की जारी रही।

सांसद सुदामा प्रसाद ने यह कहा
कार्यक्रम के बाद माले सांसद सुदामा प्रसाद ने मीडिया से बात करते हुए अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के अंगरक्षकों ने उन्हें तीन बार धक्का देकर वहां से भगा दिया गया। सांसद ने कहा कि उन्होंने कई बार सीएम से मिलने और गुलदस्ता देने की कोशिश की, लेकिन उनके कमांडो फोर्स ने उन्हें हर बार धक्का देकर हटा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में विधायक, सांसद और एमएलसी को कोई वैल्यू नहीं दी गई।
सांसद सुदामा प्रसाद ने नाराजगी जताते हुए कहा, 'अगर उद्घाटन करना ही था, तो मुख्यमंत्री हाउस से बटन दबाकर कर देते। यह बाढ़ प्रभावित इलाका है, मुख्यमंत्री को यहां की जनता की समस्याओं को सुनना चाहिए था'। उनके आने के बाद यहां भगदड़ की स्थिति बन गई थी। सांसद ने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि 'आप और एक हजार कमांडो रख लीजिए, पांच हजार सीआरपीएफ जवान रख लीजिए, लेकिन अगर आपने निमंत्रण देकर बुलाया है तो इस तरह का अपमान सही नहीं है'।