छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में बुधवार, 7 जनवरी को सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। जिले में सक्रिय 26 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इनमें सात महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में से 13 नक्सलियों पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि सभी नक्सलियों ने राज्य सरकार की ‘पुणे मार्गेम’ आत्मसमर्पण योजना से प्रभावित होकर हिंसा छोड़ने का निर्णय लिया। इन सभी ने वरिष्ठ पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया।

पुलिस के मुताबिक, ये नक्सली पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) बटालियन के अलावा दक्षिण बस्तर, माड और आंध्र-ओडिशा सीमा से जुड़े माओवादी संगठनों में सक्रिय थे। इनका नाम छत्तीसगढ़ के अभूझमाड़, सुकमा और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में हुई कई हिंसक वारदातों से जुड़ा रहा है।

इनमें कंपनी पार्टी कमेटी की सदस्य 35 वर्षीय लाली उर्फ मुचाकी आयते लखमू भी शामिल है, जिस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, लाली कई गंभीर घटनाओं में शामिल रही है, जिनमें वर्ष 2017 में ओडिशा के कोरापुट रोड पर हुए आईईडी विस्फोट की घटना भी शामिल है, जिसमें 14 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।

इसके अलावा चार अन्य प्रमुख नक्सलियों—हेमला लखमा (41), आसमिता उर्फ कमलू सन्नी (20), रामबती उर्फ पदम जोगी (21) और सुंदरम पाले (20)—ने भी आत्मसमर्पण किया है। इन चारों पर कुल आठ लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने बताया कि लखमा वर्ष 2020 में सुकमा के मिनपा इलाके में हुए हमले में शामिल थी, जिसमें 17 जवान शहीद हुए थे।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है और सरकार की नीति के तहत उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

किरण चव्हाण ने शेष माओवादी कैडर से भी हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।