नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को चांदनी चौक में ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों को भूमिगत करने की योजना की शुरुआत की। इस कदम से न केवल क्षेत्र की सुरक्षा और बिजली आपूर्ति सुधरेगी, बल्कि ऐतिहासिक इलाके की सुंदरता भी बढ़ेगी।
साथ ही मुख्यमंत्री ने मंडोली में 66/11 केवी जीआईएस ग्रिड सब-स्टेशन और शिवालिक, द्वारका व गोयला खुर्द में चार बैटरी ऊर्जा भंडारण (BESS) परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया।
चांदनी चौक में तार भूमिगत करने का महत्व
चांदनी चौक की 28 ऐतिहासिक गलियों में लटकती ओवरहेड बिजली लाइनों को हटाने के लिए बीआरपीएल और दिल्ली सरकार ने लगभग 159.75 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना शुरू की है। इसके तहत 52.5 किलोमीटर लंबी लाइन भूमिगत की जाएगी, 500 नए फीडर पिलर लगाए जाएंगे और सजावटी स्ट्रीट लाइट पोल भी स्थापित होंगे। साथ ही निगरानी के लिए ‘डिजिटल ट्विन’ तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
यह काम रात के समय चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि सामान्य जनजीवन और यातायात प्रभावित न हो। इस योजना से लगभग 10,000 उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा, और आग या खराब मौसम में बिजली कटौती की समस्या भी कम होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, "चांदनी चौक केवल बाजार नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। लटके तार न केवल सौंदर्य को प्रभावित कर रहे थे बल्कि सुरक्षा के लिए भी चुनौती बने हुए थे। अब यह क्षेत्र अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और सुंदर बनेगा।"
मंडोली में नया ग्रिड सब-स्टेशन
मंडोली ग्रिड सब-स्टेशन की क्षमता 63 एमवीए होगी, और इसकी लागत लगभग 55.5 करोड़ रुपये है। इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इस परियोजना से 1.5 लाख उपभोक्ताओं को बेहतर और स्थिर बिजली मिलेगी, विशेषकर मंडोली, हर्ष विहार, बैंक कॉलोनी, राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मंडोली जेल और डीटीसी ईवी बस डिपो जैसे संस्थानों को।
ग्रिड शुरू होने के बाद वोल्टेज की समस्या और बार-बार बिजली जाने की परेशानियों में काफी कमी आएगी।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाएँ
गर्मी में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री ने चार नई बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया। इनकी कुल क्षमता 55.5 मेगावाट/111 मेगावाट-घंटा होगी, जिससे लगभग 2.22 लाख उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा।
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शिवालिक: 50,000 उपभोक्ता
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द्वारका (जी-5): 1,28,000 उपभोक्ता
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द्वारका (जी-7): 16,000 उपभोक्ता
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गोयला खुर्द: 28,000 उपभोक्ता
सभी परियोजनाओं को मार्च 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य है। इन प्रणालियों से पीक समय में बिजली कटौती कम होगी, वोल्टेज में सुधार होगा और ग्रिड अधिक मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार विकास और विरासत को साथ लेकर चलना चाहती है ताकि राजधानी में आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक क्षेत्रों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।