दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक महिला द्वारा दाखिल की गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार याचिका पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। याचिका बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत एफआईआर दर्ज कराने के लिए थी। अदालत ने पाया कि दस्तावेज़ में गंभीर व्याकरण संबंधी त्रुटियां और असंगत वाक्य मौजूद थे, जो न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा के लिए हानिकारक हैं।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पूजा मित्तल ने कहा कि याचिका में वाक्य जैसे “The me is Lady. A LATTES simple Framner” और “The mean Lebaut was in depression” शामिल थे, जो अर्थहीन और असंगत थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह एआई टूल्स के अंधाधुंध उपयोग का परिणाम है।

मजिस्ट्रेट मित्तल ने अपने आदेश में चेतावनी दी कि तकनीक का उपयोग मानव प्रयास की जगह बढ़ रहा है, लेकिन बिना संपादन के AI दस्तावेज़ न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि एआई से तैयार किए गए दस्तावेज़ों में सावधानी न बरतने से न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

याचिकाकर्ता पूनम पांडे ने मेहरौली पुलिस स्टेशन के एसएचओ को कथित मौत की धमकियों के संबंध में शिकायत भेजी थी। लेकिन खराब ड्राफ्टिंग के कारण अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराने पर सख्त कार्रवाई का नोटिस दिया।