नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में बृहस्पतिवार को हुए विवादों के बाद फैकल्टी ने भी मोर्चा खोल दिया है। जेएनयू ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र के प्रोफेसर क्रिस्टु दास ने छात्रों और शिक्षक संघ के विरोध में परिसर के साबरमती टी पॉइंट पर आमरण अनशन शुरू किया। उनके समर्थन में कई अन्य फैकल्टी सदस्य और छात्र भी शामिल हुए हैं।
प्रोफेसर क्रिस्टु दास ने कहा कि वह यह अनशन तीन भूमिकाओं में कर रहे हैं – पहले इतिहास के पूर्व छात्र के रूप में, दूसरे जिम्मेदार नागरिक के रूप में और तीसरे जेएनयू के संकाय सदस्य के रूप में। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसर में हुई तोड़फोड़ और हंगामे से छात्रों और शिक्षकों की पढ़ाई प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी में नुकसान हुआ, छात्र संघ पदाधिकारियों को निष्कासित किया गया और इसके विरोध में छात्र संघ ने प्रदर्शन किया।
प्रोफेसर ने जोर देते हुए कहा, "कक्षाओं को बंद कर छात्रों को बाहर जाने के लिए मजबूर किया गया। यह अनशन उन लोगों के खिलाफ है जिन्होंने लोकतंत्र के नाम पर हंगामा किया और शिक्षकों व छात्रों के कक्षा में प्रवेश को रोका। हम बौद्धिक बहसों का स्वागत करते हैं, लेकिन तोड़फोड़ और हिंसा अस्वीकार्य है।"
उन्होंने यह भी कहा कि जेएनयू शिक्षक संघ और छात्र संघ को खुली बहस और संवाद के लिए आमंत्रित करना चाहिए था। अगर प्रशासन निष्कासन रद्द नहीं कर रहा है, तो छात्र संघ अदालत का सहारा क्यों नहीं ले रहा है। प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय की बौद्धिक संस्कृति की रक्षा पर जोर दिया।
शोधार्थी छात्र सप्तार्ष शील ने कहा कि जेएनयू लंबे समय से लोकतंत्र और अध्ययन का केंद्र रहा है, लेकिन कुछ उपद्रवियों की वजह से अध्ययन माहौल खतरे में है। उन्होंने बताया कि कई इमारतों को बंद कर दिया गया है और कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने सभी को जेएनयू के अध्ययन माहौल को सुरक्षित रखने के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।