नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पुराने वाहनों (सेकेंड हैंड) की बिक्री और हस्तांतरण को नियंत्रित करने में नाकामी के लिए दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने हाल ही में लाल किले में हुए बम धमाके का जिक्र करते हुए कहा कि इस हमले में भी एक सेकेंड हैंड कार का इस्तेमाल हुआ था, जिससे सुरक्षा संबंधी मुद्दे और गंभीर हो गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा, "एक कार कई बार हाथ बदलती है लेकिन मूल मालिक नहीं बदलता। इसका क्या अर्थ है? मूल मालिक को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। आप इस तरह की चूक कैसे अनुमति दे रहे हैं? क्या आपको दो-तीन और घटनाओं के बाद ही कार्रवाई करनी होगी?"
अदालत ने दिल्ली सरकार को मामले पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया और स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई के लिए और समय नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में निर्धारित की गई है।
यह मामला टुवर्ड्स हैपी अर्थ फाउंडेशन द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के सिलसिले में सामने आया। याचिका में केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (नियम 55A से 55H) के सही ढंग से लागू न होने की समस्या उठाई गई है। ये नियम दिसंबर 2022 में पंजीकृत वाहन डीलरों को नियंत्रित करने के लिए लाए गए थे।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य सेकेंड हैंड वाहन बाजार में जवाबदेही सुनिश्चित करना था, लेकिन नियामक खामियों और प्रक्रियागत बाधाओं के कारण यह लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया। डीलर से डीलर होने वाले हस्तांतरण की रिपोर्टिंग के लिए कोई स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था नहीं है, जिससे जिम्मेदारी की श्रृंखला टूट जाती है और कानून का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।